महिला आरक्षण बिल: मोदी सरकार को 360 वोट चाहिए, क्या मिलेगी उम्मीद की किरण?

मोदी सरकार के लिए आज लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर वोटिंग का दिन बेहद चुनौती भरा है। NDA के पास लोकसभा में कुल 293 सांसद हैं, जबकि संवैधानिक संशोधन बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी करीब 360 वोटों की जरूरत है। लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 540 है (कुछ …

Apr 17, 2026 - 18:27
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महिला आरक्षण बिल: मोदी सरकार को 360 वोट चाहिए, क्या मिलेगी उम्मीद की किरण?
मोदी सरकार के लिए आज लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर वोटिंग का दिन बेहद चुनौती भरा

महिला आरक्षण बिल: मोदी सरकार को 360 वोट चाहिए, क्या मिलेगी उम्मीद की किरण?

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कम शब्दों में कहें तो, आज लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर वोटिंग मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। NDA के पास लोकसभा में केवल 293 सांसद हैं, जबकि इस बिल को पास करने के लिए करीब 360 वोटों की आवश्यकता है।

वास्तव में, यह दिन मोदी सरकार के लिए लोकसभा में महत्वपूर्ण है, जहां महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन बिल पर मतदान हो रहा है। NDA के पास कुल 293 सांसद हैं, जो कि दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक 360 वोटों से काफी कम है, जबकि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 540 है। ऐसे में, यह स्पष्ट है कि एनडीए को अपनी संख्या बढ़ाने के लिए समर्थन की तलाश करनी पड़ेगी।

बिल की पृष्ठभूमि

सरकार ने यह ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाने के लिए तीन बिल पेश किए हैं, जिनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन बिल शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है, जिसके लिए जनगणना और परिसीमन आवश्यक है। परिसीमन से लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 तक हो सकती है। हालांकि, विपक्ष विशेषकर दक्षिणी राज्यों (जैसे तमिलनाडु) में इसे विरोध का सामना कर रहा है।

कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन इस महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर रहा है, लेकिन वे परिसीमन को अलग करने की मांग कर रहे हैं, ताकि इससे उत्तर और दक्षिण के बीच राजनीतिक असंतुलन ना बढ़े।

राज्यसभा में भी स्थिति जटिल

राज्यसभा में भी NDA को संख्या की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जहां सदस्य संख्या 142-145 के बीच है, जबकि 163 वोटों की आवश्यकता है। मोदी सरकार YSRCP जैसे दलों के समर्थन पर निर्भर है या विपक्ष के एब्सटेंशन (अनुपस्थिति/वॉकआउट) की अपेक्षा कर रही है, ताकि प्रभावी वोटिंग संख्या को कम किया जा सके।

कुछ निर्दलीय और छोटे दल भी इस प्रक्रिया में निर्णायक साबित हो सकते हैं। वास्तव में, आधी रात को 2023 के मूल अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना भी जारी की गई है। यह न केवल एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि एक बैकअप प्लान के रूप में भी काम कर सकता है यदि नया बिल असफल होता है।

पीएम मोदी की उम्मीद और चेतावनी

पीएम मोदी ने इसे ‘नारी शक्ति सशक्त भारत’ की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है और इसे लागू करने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी दी है कि वे इस आवश्यक परिवर्तन के रास्ते में बाधा डालने से बचें। आज शाम 4 बजे वोटिंग होने की संभावना है, और अगर यह बिल पास होता है, तो यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने में एक अभूतपूर्व कदम साबित होगा।

हालांकि, परिसीमन विवाद निश्चित रूप से क्षेत्रीय असंतोष और राजनीतिक तनाव को भी बढ़ा सकता है। ऐसे में, संसद की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

निष्कर्ष के तौर पर, यह कहा जा सकता है कि महिला आरक्षण बिल का पारित होना न केवल राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका को भी मजबूत करेगा। इसके परिणामों के लिए सभी को इंतजार रहेगा।

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सादर, टीम इंडिया ट्वोडे - प्रियंका शर्मा

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