हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर शिवराज सिंह चौहान का संतों से आशीर्वाद मांगना
हरिद्वार : हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समागम को सम्बोधित करते हुए “एक राष्ट्र-एक चुनाव” की ताकत और आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की प्रगति के लिए बाधक बताते हुए संत समाज से इस संवैधानिक परिवर्तन के लिए जनजागरण का […] The post ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर हरिद्वार में महामंथन, शिवराज सिंह चौहान ने संतों से मांगा आशीर्वाद first appeared on Vision 2020 News.
हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर शिवराज सिंह चौहान का संतों से आशीर्वाद मांगना
हरिद्वार : हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक महत्वपूर्ण संत समागम में भाग लेते हुए “एक राष्ट्र-एक चुनाव” के सिद्धांत की आवश्यकता और महत्व पर जोर दिया। उन्होंने देखा कि बार-बार होने वाले चुनावों से देश की प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस संदर्भ में संत समाज से उन्होंने जनजागरण को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मांगा।
इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित थे और उन्होंने केंद्रीय मंत्री के विचारों का समर्थन किया। शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित इस विचार को देश के लिए अत्यंत आवश्यक बताया, जो राष्ट्र की विकास प्रक्रिया को सुगम बना सके।
चुनावों की बढ़ती चुनौतियाँ
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लगातार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक ऊर्जा का भारी नुकसान होता है। उनके अनुसार, यह स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रभाव डालती है, जहां चुनावों के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चुनावों के लिए जो भारी समय, संसाधन और धन खर्च होता है, वह लाखों करोड़ों में पहुंच जाता है। यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते हैं, तो इससे संसाधनों की बचत होगी और प्रशासन का ध्यान विकास कार्यों की ओर केंद्रित होगा।
जनजागरण का आह्वान
उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे अपने प्रयासों और ज्ञान का उपयोग कर जनजागरण में सहायक बनें। उनका मानना था कि संतों का सहारा इस विचार को तेजी से फैलने में मदद करेगा और यह नीति राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में काम करेगी। शिवराज सिंह चौहान ने संतों से निवेदन किया कि वे अपने प्रवचनों में “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का समर्थन करें ताकि आम नागरिकों में इसके प्रति जागरूकता बढ़े।
समर्थन का महत्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार इस दिशा में अग्रसर है और जनसमर्थन बढ़ाने में सक्रिय योगदान देगी। शिवराज सिंह चौहान ने उपस्थित संतों और जनता से आशीर्वाद मांगा और वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करने की भी अपील की। उनका विश्वास है कि संतों का साथ मिलने पर “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का संकल्प पूरा हो सकता है और इससे भारत के विकास की राह खुल सकेगी।
वंदे मातरम का सांस्कृतिक महत्व
शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम के महत्व पर भी जोर दिया, इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय वंदे मातरम को विभाजित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन अब भारत को फिर से विभाजित नहीं होने दिया जाएगा। वे संत समाज से आह्वान करते हैं कि वे वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करें ताकि नागरिकों में इस भावना को जागृत किया जा सके।
निष्कर्ष
इस समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि “एक राष्ट्र-एक चुनाव” केवल एक राजनीतिक एजेंडा नहीं है, बल्कि यह देश की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का एक अहम अंग है। संतों का समर्थन इस विचार को प्रबल बना सकता है और देश को एक नई दिशा में ले जा सकता है।
कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार में आयोजित इस संत समागम में, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “एक राष्ट्र-एक चुनाव” की आवश्यकता को रेखांकित किया और संतों से जनजागरण का आह्वान किया। अधिक अपडेट के लिए, यहां क्लिक करें।
यह लेख टीम इंडिया टुडे द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
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