महिला आरक्षण विवाद: गौरव गोगोई ने परिसीमन प्रक्रिया को कहा ‘राजनीतिक हथियार’
नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है और महिला आरक्षण को इससे जोड़कर लागू करने में देरी …
महिला आरक्षण विवाद: गौरव गोगोई ने परिसीमन प्रक्रिया को कहा ‘राजनीतिक हथियार’
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कम शब्दों में कहें तो, कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उनका कहना है कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया का उपयोग एक राजनीतिक औजार के रूप में कर रही है।
नई दिल्ली: भारत की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के उप नेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। गोगोई ने बताया कि कैसे सरकार परिसीमन प्रक्रिया का उपयोग कर रही है और इसे महिला आरक्षण से जोड़ने में देरी कर रही है।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक की चर्चा
कांग्रेस सांसद गोगोई ने संसद में ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर 2029 से लागू किया जाना चाहिए। उनका यह मानना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखकर लागू किया जाना चाहिए।
विपक्ष की आवाज को नकारना
गोगोई ने याद दिलाया कि सोनिया गांधी ने भी महिला आरक्षण के समर्थन में इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध किया था। लेकिन सरकार ने उस समय विपक्ष की बातों को नजरअंदाज कर दिया। उनका कहना था कि यदि 2023 में विपक्ष के सुझावों पर ध्यान दिया गया होता, तो महिला आरक्षण कानून पहले ही प्रभावी हो चुका होता।
महिला आरक्षण का राजनीतिकरण
गोगोई ने यह आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर असल में परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि परोक्ष रूप से परिसीमन लागू करने की राजनीतिक मंशा को दर्शाता है।” इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार का असली इरादा महिला आरक्षण को सशक्त बनाना नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ लेना है।
लोेसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के कारण
इस मुद्दे पर गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि लोकसभा सीटों की संख्या को 815 करने का आधार क्या है। उनके अनुसार, सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट तर्क पेश नहीं किया है। यह आश्चर्यजनक है कि ऐसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी है।
कांग्रेस का समर्थन, लेकिन परिसीमन से दूर रखने की आवश्यकता
गोगोई ने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना देश के संघीय ढांचे और संवैधानिक संतुलन के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के जल्द लागू किया जाए।
राजनीतिक लाभ का उदाहरण
साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर और असम में हुए परिसीमन के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि इस प्रक्रिया का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। गोगोई का कहना था कि यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे राजनीतिक फायदे के तहत नहीं आना चाहिए।
निष्कर्ष
गोगोई ने निष्कर्ष में यह कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए। सरकार को इस दिशा में पारदर्शी तरीके से कदम उठाना चाहिए। महिला आरक्षण भारत के समाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसे राजनीतिक राजनीतिक विवादों से दूर रखना चाहिए।
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सादर,
टीम इंडिया टुडे,
अंजली शर्मा
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