मुख्यमंत्री धामी का कृषि संकट से निपटने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने का संदेश

खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने निजी आवास नगला तराई स्थित खेत में स्वयं टिलर चलाकर खेत की जुताई की तथा खेत में गोबर की प्राकृतिक खाद डालकर जैविक एवं पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने का संदेश दिया। इस दौरान उनकी माता बिशना देवी भी उनके साथ उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने खेत […]

Jun 15, 2026 - 18:27
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मुख्यमंत्री धामी का कृषि संकट से निपटने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने का संदेश
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने निजी आवास नगला तराई स्थित खेत में स्वयं टि

मुख्यमंत्री धामी का कृषि संकट से निपटने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने का संदेश

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जैविक खेती के महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

खटीमा। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने निजी आवास नगला तराई स्थित खेत में स्वंय टिलर चलाया और खेत में गोबर की प्राकृतिक खाद डालकर जैविक एवं पारंपरिक खेती को प्रोत्साहन देने का संदेश दिया। इस दौरान उनकी माता बिशना देवी भी उनके साथ उपस्थित रहीं, जो किसान परिवार की पृष्टभूमि को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खेती करने के महत्व पर चर्चा की और यह बताया कि हमारी कृषि मात्र आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

कृषि में पारंपरिक और आधुनिक तकनीक का महत्व

मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ नवीनतम आधुनिक तकनीकों को मिलाकर अधिक समृद्ध और टिकाऊ खेती की जा सकती है। उन्होंने बताया कि गोबर की खाद जैसी प्राकृतिक खादें न केवल भूमि की उर्वरता को बढ़ाने में मदद करती हैं, बल्कि ये पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें

मुख्यमंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें और जैविक खेती की ओर बढ़ें, ताकि न केवल कृषि की गुणवत्ता बढ़ सके, אלא परिवारों की आय भी बढ़े। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार किसानों की आय में सुधार लाने, कृषि को आधुनिक बनाने और जैविक उत्पादों की बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।" 

उत्तराखंड की कृषि पहचान

धामी ने बताया कि उत्तराखंड की पहचान कृषि, ग्रामीण संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक खेती, बागवानी तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ ला रही है। युवा पीढ़ी को खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री का यह कदम कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की भलाई के लिए एक सकारात्मक शुरुआत है। जैविक खेती को बढ़ावा देकर हम न केवल अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ा सकते हैं, बल्कि हमारी संस्कृति को भी संरक्षित कर सकते हैं। इस नई दिशा की ओर आगे बढ़ने से उत्तराखंड और उसके किसान निश्चित रूप से लाभान्वित होंगे।

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सादर,

टीम इंडिया टुडे - सुषमा

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