सास-बहू ने मिलकर शुरू किया राखी का स्वरोजगार, रक्षाबंधन के त्योहार पर बढ़ी बिक्री

रैबार डेस्क: रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी... The post बहू ने प्राइवेट नौकरी छोड़कर सास के साथ शुरू किया राखी का स्वरोजगार, चल निकला कारोबार appeared first on Uttarakhand Raibar.

Aug 22, 2026 - 09:27
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सास-बहू ने मिलकर शुरू किया राखी का स्वरोजगार, रक्षाबंधन के त्योहार पर बढ़ी बिक्री
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सास-बहू ने मिलकर शुरू किया राखी का स्वरोजगार, रक्षाबंधन के त्योहार पर बढ़ी बिक्री

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक शानदार कदम उठाते हुए सास-बहू की जोड़ी ने अपने स्वरोजगार से कारोबार में सफलता की नई कहानी लिखी है।

रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हैंडमेड राखियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।

स्वरोजगार में चमत्कार: लीला और अलका रावत की कहानी

रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी राखी कारोबार में अपनी अलग पहचान बना रही है। रायपुर ब्लॉक की नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाएं मिलकर आकर्षक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उन्होंने दो हजार से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अब तक करीब 1,500 राखियां तैयार की जा चुकी हैं।

पिछले साल की उपलब्धियाँ और आगे की योजनाएं

लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ। दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बिक्री की, जिससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। उत्साह बढ़ने के बाद इस वर्ष उन्होंने राखी कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है।

प्राइवेट नौकरी का त्याग, स्वरोजगार का चयन

अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ स्वरोजगार की राह चुनी। दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। एनआरएलएम के सहयोग से शुरू किए गए इस स्वरोजगार के माध्यम से वे राखियों के साथ अन्य हस्तनिर्मित एवं स्थानीय उत्पादों का भी कारोबार कर रही हैं। अलका के अनुसार समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आय का बेहतर अवसर मिला है। साथ ही सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर वह स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी मिल रहे ऑर्डर

हैंडमेड राखियों की बिक्री अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। इससे उनके कारोबार को स्थानीय बाजार के साथ-साथ डिजिटल बाजार में भी विस्तार मिल रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन सहित विभिन्न सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष, नजरबट्टू समेत कई पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। राखियों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का काम भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं।

अन्य महिलाओं का योगदान

रायपुर के साथ ही सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला विकासखंड की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इन राखियों की बिक्री रायवाला और श्यामपुर के विभिन्न बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है। सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनकी राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है और सेलाकुई, सहसपुर तथा विकासनगर क्षेत्र में भी अच्छा बाजार मिल रहा है।

दून के प्रमुख मॉलों में होंगे स्टॉल

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून जिले के सहसपुर, रायपुर और डोईवाला विकासखंड की सीएलएफ से जुड़ी महिलाएं उच्च गुणवत्ता की राखियां तैयार कर रही हैं।

इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन द्वारा देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉलों में भी राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। आमजन से अपील की गई है कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों और अन्य उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करें।

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के अंतर्गत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राखियों के साथ विभिन्न प्रकार के पहाड़ी एवं स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगी।

रिक्त विवरण और निष्कर्ष की ओर बढ़ते हुए, यह सास-बहू की जोड़ी वास्तव में उन अनेक महिलाएं हैं जो अपने मेहनत और लगन से सफलता की नई कहानी लिख रही हैं। इसके साथ ही, इस तरह के स्वरोजगार से न केवल वे आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं, बल्कि अपने समुदाय में भी प्रेरणा की मिसाल बन रही हैं।

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सादर, टीम इंडिया टुडे - साक्षी मिश्रा

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