अंकिता भंडारी केस: सीबीआई ऑफिस के बाहर भारी बारिश में तीव्र प्रदर्शन, संबोधन और सवालों का केंद्र

रैबार डेस्क: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक दलों... The post अंकिता भंडारी केस: जांच में देरी पर सीबीआई कार्यालय में भारी बारिश के बीच जोरदार प्रदर्शन, तालाबंदी appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jul 3, 2026 - 09:27
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अंकिता भंडारी केस: सीबीआई ऑफिस के बाहर भारी बारिश में तीव्र प्रदर्शन, संबोधन और सवालों का केंद्र

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी केस को लेकर कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने एक बार फिर से अपना विरोध दर्ज कराया। गुरुवार को देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन में भारी बारिश भी रुकावट नहीं बना पाई। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इस चुनौतीपूर्ण मौसम में भी अपनी आवाज उठाई।

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर जन सरोकारों के लिए समर्पित कई संगठनों ने “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” के बैनर तले सीबीआई कार्यालय के बाहर तालाबंदी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारों की से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों उठाए और सीबीआई अधिकारियों से जवाब मांगें। प्रदर्शन के बावजूद, पुलिस प्रशासन ने सीबीआई कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी, लेकिन आंदोलनकारियों ने अपनी ताकत दिखाते हुए एक वैकल्पिक मार्ग से कार्यालय तक पहुँच कर वहाँ भी प्रतीकात्मक तालाबंदी की।

प्रदर्शन में उठाए गए प्रमुख प्रश्न

प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई अधिकारियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए:

  • 1. अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP कौन है?
  • 2. दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नामों के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई?
  • 3. मुख्यमंत्री के आदेश पर की गई कार्रवाई का कोई परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
  • 4. साक्ष्य मिटाने की कोशिश करने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • 5. छह महीने बाद भी सीबीआई जांच की स्थिति क्या है?
  • 6. क्या सीबीआई ने उर्मिला सनावर और रेनू बिष्ट से पूछताछ की है?
  • 7. अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया?

बारीश नहीं रोकी आवाज़

भारी बारिश के बीच भी मौजूद लोगों ने धैर्यपूर्वक वक्ताओं की बातों को सुना। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनकी आवाज है, जो न्याय के लिए उठाई जा रही है।

पारिवारिक और सामाजिक सुरक्षा का सवाल

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने दावा किया कि यह लड़ाई केवल अंकिता के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और न्याय के लिए है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे।

सीबीआई अधिकारियों द्वारा वार्ता के दौरान उठाए गए सवालों पर जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आंदोलनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। पुलिस ने सुरक्षा के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी, फिर भी यह प्रदर्शन सफल रहा।

जैसा कि इस मामले में जटिलता बढ़ रही है, विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक दल भी इस आवाज के सहारे अपनी राजनीतिक पहचान बनाने में जुटे हैं। इस प्रकार के प्रदर्शन दर्शाते हैं कि जनता की आवाज़ को अनसुना नहीं किया जा सकता, और आवाज उठाना लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आगे इस मामले में क्या प्रगति होती है, इसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार है। इसके साथ ही, न्याय की इस मुहिम में सभी संगठनों की एकजुटता और सक्रियता एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

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Team India Twoday - प्रियंका शर्मा

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