उत्तराखंड की पारेषण परियोजना को मिली भारत सरकार की स्वीकृति, ₹3,638 करोड़ का निवेश महत्वपूर्ण उपलब्धि

  देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप उत्तराखण्ड की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) की आज नई दिल्ली में आयोजित 167वीं स्क्रीनिंग समिति की बैठक में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड […]

Oct 10, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड की पारेषण परियोजना को मिली भारत सरकार की स्वीकृति, ₹3,638 करोड़ का निवेश महत्वपूर्ण उपलब्धि
  देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप उत्तराखण्ड की विद्युत प

उत्तराखंड की पारेषण परियोजना को मिली भारत सरकार की स्वीकृति, ₹3,638 करोड़ का निवेश महत्वपूर्ण उपलब्धि

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से उत्तराखंड की विद्युत पारेषण व्यवस्था को मजबूती मिली है। भारत सरकार ने ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। आज नई दिल्ली में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) की 167वीं स्क्रीनिंग समिति की बैठक में, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को एशियाई विकास बैंक (ADB) से ऋण वित्तपोषण हेतु स्वीकृति प्रदान की गई। यह बैठक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अपर सचिव की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।

उल्लेखनीय है कि इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री धामी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ दीर्घकालिक समन्वय को जाता है, जिसमें केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ लगातार संवाद शामिल है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रमुख सचिव ऊर्जा, आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने स्क्रीनिंग समिति के समक्ष इस महत्वपूर्ण परियोजना का सफलतापूर्वक प्रस्तुतीकरण किया।

समिति ने ‘उत्तराखंड क्लाइमेट रेजिलिएंट इंट्रा-स्टेट पावर ट्रांसमिशन सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ (UCRISPTSDP) के अंतर्गत 255 मिलियन अमेरिकी डॉलर, अर्थात लगभग ₹2,182 करोड़ की वित्तीय मदद के लिए प्रस्तावित ADB ऋण को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 425 मिलियन अमेरिकी डॉलर, अर्थात लगभग ₹3,638 करोड़ है। इसमें 60 प्रतिशत वित्तपोषण ADB ऋण के माध्यम से और शेष 40 प्रतिशत काउंटरपार्ट अंशदान की व्यवस्था पिटकुल एवं राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।

परियोजना के अंतर्गत विभिन्न प्रमुख कार्यों की योजना बनाई गई है, जिसमें शामिल हैं:

  • – 400 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
  • – 220 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
  • – 132 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
  • – 66 केवी का 01 विद्युत उपकेंद्र।
  • – विभिन्न विद्युत पारेषण लाइनों का निर्माण।
  • – संबंधित सिविल कार्य एवं परामर्श सेवाएँ।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की विद्युत पारेषण क्षमता को बढ़ाना, विश्वसनीयता में सुधार करना और जलवायु परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों का सामना करने की क्षमता में इजाफा करना है। इससे प्रदेश में बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

भारत सरकार की स्क्रीनिंग समिति द्वारा इस स्वीकृति के बाद, अब एDB द्वारा ऋण प्रस्ताव के प्रसंस्करण के लिए ड्यू डिलिजेंस की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इसके बाद एDB की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, ऋण की अंतिम स्वीकृति संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

समीक्षा में मिली इस उपलब्धि से स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड की सरकारी मशीनरी का प्रयास विद्युत क्षेत्र में सुधार लाने के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण परिणाम दे रहा है। इस बात की पुष्टि ही नहीं होती कि प्रदेश के विकास के लिए उचित निवेश किया जा रहा है, बल्कि इससे ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता भी आएगी।

यही कारण है कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत पारेषण परियोजनाएँ न केवल मौजूदा स्थिति को सुधारेंगी, बल्कि भविष्य में भी विकास की नई राहें खोलेंगी।

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सादर,

टीम इंडिया टुडे, पूनम शर्मा

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