उत्तराखंड: DGP से मिलने पहुंचे विधायक अरविंद पांडे, परिवार पर लगे आरोपों की सख्त जांच और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग

देहरादून: उत्तराखंड के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि हड़पने के आरोपों से जुड़े विवाद में सुर्खियों में हैं। उनके परिवार के सदस्यों (भाई देवानंद पांडे सहित अन्य रिश्तेदारों) पर बाजपुर पुलिस में धोखाधड़ी, धमकी और फर्जीवाड़े से जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज होने के बाद …

Jan 31, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड: DGP से मिलने पहुंचे विधायक अरविंद पांडे, परिवार पर लगे आरोपों की सख्त जांच और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग

देहरादून: उत्तराखंड के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि हड़पने के आरोपों से जुड़े विवाद में सुर्खियों में हैं। उनके परिवार के सदस्यों (भाई देवानंद पांडे सहित अन्य रिश्तेदारों) पर बाजपुर पुलिस में धोखाधड़ी, धमकी और फर्जीवाड़े से जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज होने के बाद विधायक ने खुद निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विधायक अरविंद पांडे ने आज देहरादून में उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने मामले की सख्त और निष्पक्ष जांच की अपील की। साथ ही, उन्होंने प्रस्ताव रखा कि जिन पर मुकदमा दर्ज है (परिवार पक्ष), जिन्होंने मुकदमा लिखवाया है और गवाह हैं—तीनों पक्षों का पॉलीग्राफ टेस्ट (लाइ डिटेक्टर) और नार्को टेस्ट कराया जाए।

विधायक ने कहा, “इससे सच्चाई पूरी तरह सामने आ जाएगी। कौन सही है और कौन गलत, यह स्पष्ट हो जाएगा। यदि मैं या मेरा परिवार दोषी पाया जाता है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” उन्होंने जोर दिया कि जांच में किसी भी तरह की पक्षपात नहीं होना चाहिए और दोषी को सजा मिलनी चाहिए, जबकि निर्दोष को पूरी तरह बरी किया जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तराखंड भाजपा में टिकट बंटवारे, गुटबाजी और आंतरिक कलह की खबरें लगातार चल रही हैं। विधायक अरविंद पांडे, जो 2012 से गदरपुर से विधायक हैं और 2017-2022 तक कैबिनेट मंत्री रहे, RSS से भी जुड़े हुए हैं। हाल के महीनों में उनके खिलाफ कुछ अन्य विवाद भी सामने आए थे, जैसे कैंप ऑफिस पर अतिक्रमण का नोटिस आदि, लेकिन वर्तमान भूमि विवाद सबसे चर्चित है।

डीजीपी ने विधायक की मांग पर गंभीरता दिखाई है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट अदालत की अनुमति से ही संभव हैं और जांच को मजबूती दे सकते हैं।

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