चार धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन: सीएम धामी का महत्वपूर्ण बयान
रैबार डेस्क: हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने... The post चार धामों में बैन होगी गैर हिंदुओं की एंट्री! मंदिर समितियों के फैसले पर सीएम धामी का ये बयान आया सामने appeared first on Uttarakhand Raibar.
चार धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन: सीएम धामी का महत्वपूर्ण बयान
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार से लेकर चार धामों तक गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने की मांग उठी है। यह फैसला धार्मिक समितियों द्वारा प्रस्तावित हुआ है, जिस पर सीएम धामी ने अपने विचार साझा किए हैं।
रायबाजार डेक्स: हाल ही में हरिद्वार के हर की पौड़ी स्थित धार्मिक स्थल पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने की मांग तीर्थ स्थलों तक पहुंच चुकी है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने यह निर्णय लिया है कि वे अपने सभी मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की योजना बनाएंगे। इसके लिए समिति अगले बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव प्रस्तुत करने का विचार बना रही है। इसी प्रकार, गंगोत्री मंदिर समिति ने भी गंगोत्री धाम और शीतकालीन गद्दीस्थल मुखवा में प्रवेश निषेध का निर्णय किया है। इस पहल पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार धार्मिक संगठनों और संतों के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
आधिकारिक बैठक से सामने आए तथ्य
25 जनवरी को, श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि आगामी समिति के सम्मेलन में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसी दिन, श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि गंगोत्री धाम और शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में गैर हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से बैन रहेगा। श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने इस निर्णय का समर्थन किया।
सीएम धामी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए कहा, "इन पवित्र स्थानों की व्यवस्था और देखरेख हमेशा से विभिन्न धार्मिक संगठनों, तीर्थ सभाओं और पूज्य संत समाज के पास रही है। सरकार इस परंपरा का सम्मान करती है।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार का यह स्पष्ट मत है कि धार्मिक स्थलों पर जो भी निर्णय लिए जाएं, वे धार्मिक संगठनों की राय के आधार पर ही होंगे।
सीएम धामी ने कहा, "मंदिरों में किसे प्रवेश देना है और किसे नहीं, इसका फैसला मंदिर के प्रबंधन को ही करना होगा। सरकार इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी और न ही कोई आदेश देगी। यह केवल मंदिर समितियों पर निर्भर करता है कि वे क्या निर्णय लेते हैं।" उन्होंने पुराने कानूनों के अध्ययन की बात भी की, ताकि भविष्य में और बेहतर निर्णय लिया जा सके।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का मुद्दा
गौरतलब है कि यह मामला केवल एक धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारतीय संस्कृति और धार्मिक सहिष्णुता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। धार्मिक स्थलों पर इस तरह के बैन की मांग करने वाले व्यक्तियों کا यह तर्क है कि ये स्थल केवल हिंदुओं के लिए पवित्र हैं, इसलिए इस पर बैन लगाया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, कई लोग इसे अस्वीकार्य मानते हैं और मानते हैं कि धार्मिक स्थलों पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए। यह विषय समाज में विभाजन का कारण भी बन सकता है।
इस विषय पर कई विद्वानों और धार्मिक संगठनों ने अपनी राय व्यक्त की है। कई ने इस कदम का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने इसके समावेशी दृष्टिकोण को चुनौती दी है। निश्चित रूप से यह एक ऐसा मामला है, जिस पर व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
अंत में
चार धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन का मामला भारतीय समाज में एक जटिल दृष्टिकोण को दर्शाता है। राजनीतिगत, धार्मिक और सामाजिक नजरिए से इस पर विचार करने की आवश्यकता है। इस विषय पर आगे की कार्यवाही देखने के लिए सभी की नज़रें लगाए हुए हैं।
आगे संघीय नीति और धार्मिक कला के बीच संतुलन बनाना, सरकार और धार्मिक संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती होने जा रहा है। हमें उम्मीद है कि एक संतुलित और सहिष्णु दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
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टीम इंडिया टुडे - अनामिका शर्मा
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