नोएडा के संयुक्त निदेशक गौरव गौतम ने की आत्महत्या, 70 लाख के कर्ज का किया जिक्र
नोएडा। नोएडा के सेक्टर-110 क्षेत्र में लोकसभा सचिवालय में कार्यरत संयुक्त निदेशक गौरव गौतम (40) ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पुलिस को मौके से 10 पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने आर्थिक तंगी और करीब 70 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख किया है। पुलिस …
नोएडा में लोकसभा के संयुक्त निदेशक की आत्महत्या
कम शब्दों में कहें तो, नोएडा के सेक्टर-110 में लोकसभा सचिवालय में कार्यरत गौरव गौतम ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उनके द्वारा छोड़ा गया 10 पन्नों का सुसाइड नोट इस दुखद incident का कारण बन गया है।
नोएडा। हाल ही में नोएडा के सेक्टर-110 क्षेत्र में एक गहरे सदमे का मामला सामने आया है, जहां लोकसभा सचिवालय में कार्यरत संयुक्त निदेशक गौरव गौतम (40) ने अपनी जान ले ली। संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या करने के बाद, पुलिस को घटनास्थल से 10 पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है। इस नोट में उन्होंने आर्थिक तंगी और लगभग 70 लाख रुपये के कर्ज का वर्णन किया है, जो उनकी परेशानियों का मुख्य कारण प्रतीत होता है।
पुलिस के अनुसार, गौरव गौतम केंद्रीय विहार-2, पॉकेट-7 में परिवार के साथ रहते थे। घटना के समय उनकी पत्नी घर से बाहर थीं। जब वह वापस लौटीं, तो पति को कमरे में लटका हुआ पाया। तुरंत ही पड़ोसियों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस और फॉरेंसिक टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और सुसाइड नोट को कब्जे में लिया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि गौरव लंबे समय से आर्थिक दबाव में थे। वह विभिन्न प्रकार की ज़िम्मेदारियों और कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे, जो उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल रहा था।
सुसाइड नोट में गौरव ने लिखा है कि उन्होंने विभिन्न कारणों से लगभग 70 लाख रुपये का कर्ज ले रखा था, जिसे चुकाना उनके लिए अब संभव नहीं रह गया था। मानसिक तनाव के कारण उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया। गौरव ने अपने नोट में ये भी स्पष्ट किया है कि उनके परिवार का इस स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है। यह नोट उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लेते।
एसीपी दीक्षा सिंह ने बताया कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और अन्य तथ्यों की फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी। इसके अलावा, पुलिस मोबाइल फोन, आर्थिक लेनदेन और कर्ज से जुड़े दस्तावेजों की भी गहनता से जांच कर रही है। जांच के परिणाम के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरव की आत्महत्या ने इस मुद्दे पर एक गंभीर सवाल खड़ा किया है कि क्या हमारी समाज में आर्थिक दबाव से निपटने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध है? क्या हमें वास्तव में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को ध्यान में लेकर कार्य करने की आवश्यकता नहीं है? यह घटना हमें आपकी चिंता और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती है। अगर आप या आपके आसपास कोई इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है तो उन्हें सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करें।
पुलिस जांच के परिणामों का सभी को इंतजार है, जबकि इस घटना ने एक बार फिर से समाज में मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
इस विषय में अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें।
सादर, टीम इंडिया टुडे
What's Your Reaction?