रक्षाबंधन के पर्व पर बीरोंखाल में लोक संस्कृति का उत्सव, कवींद्र इष्टवाल ने साझा की बहनों की जिम्मेदारी
बीरोंखाल, पौड़ी। चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज स्यूंसी में रक्षाबंधन के अवसर पर कांग्रेस नेता कवींद्र इष्टवाल की ओर से रक्षा सूत्र बंधन एवं भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। बहनों ने कवींद्र इष्टवाल को रक्षा सूत्र बांधकर भाई-बहन के …
रक्षाबंधन के पर्व पर बीरोंखाल में लोक संस्कृति का उत्सव, कवींद्र इष्टवाल ने साझा की बहनों की जिम्मेदारी
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कम शब्दों में कहें तो, चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज स्यूंसी में रक्षाबंधन के अवसर पर कांग्रेस नेता कवींद्र इष्टवाल द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने क्षेत्र में विशेष स्थान बना लिया। इस उत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और भाई-बहन के रिश्ते की स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी का संदेश दिया।
बीरोंखाल, पौड़ी में आयोजित इस कार्यक्रम में महिला मंगल दलों द्वारा लोकगीत एवं लोकनृत्य का आयोजन किया गया। महिलाओं ने उत्तराखंड की समृद्ध पारंपरिक लोक संस्कृति का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में सफल महिला मंगल दलों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जबकि अन्य प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इस आयोजन में महिलाओं को शाल ओढ़ाकर सम्मानित करने का कार्य भी किया गया।
कांग्रेस नेता कवींद्र इष्टवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षाबंधन का यह पर्व केवल राखी बांधने और मिठाई खिलाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि चौबट्टाखाल क्षेत्र की सभी बहनें उनके लिए परिवार की तरह हैं। उनका विश्वास उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
इष्टवाल ने क्षेत्र की महिलाओं की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे उनकी प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं को समझना आवश्यक है ताकि उनकी आवाज को सुन सके।
इस आयोजन का मूल उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि महिलाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना और उनकी आवाज को मजबूती से उठाना है। इष्टवाल ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं समाज की संस्कृति और धरोहर की सच्ची संरक्षक होती हैं, इसलिए उनके सम्मान और सशक्तिकरण के बिना क्षेत्र का विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा, "लोकगीत और लोकनृत्य उत्तराखंड की पहचान हैं। ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर मिलता है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी लोक संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं।" कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन के समय सभी ने लोकनृत्य किया और परिसर उत्तराखंड की लोक संस्कृति में रंग गया।
कार्यक्रम संयोजक जगदीश बिष्ट ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि संचालन देवेंद्र बिष्ट और विजय पाल सिंह ने किया। इस अवसर पर कई प्रमुख स्थानीय व्यक्तियों, जैसे सेवानिवृत्त कर्नल यशपाल नेगी, बलवंत सिंह रावत, विनीता देवी और अन्य ने भाग लिया। कार्यक्रम में महिलाओं की भारी भागीदारी ने रक्षाबंधन के पर्व को एक यादगार अवसर बना दिया।
कुल मिलाकर, यह उत्सव केवल एक सांस्कृतिक समारोह नहीं था, बल्कि बहनों की आत्मीयता, संस्कृति और एकजुटता का प्रतीक बन गया।
इसके अलावा, इस कार्यक्रम के माध्यम से आयोजित सांस्कृतिक गतिविधियों ने न केवल लोक संस्कृति को जीवित रखा, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं को एक मंच भी प्रदान किया, जहाँ से वे अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकें।
इसके साथ ही, रक्षाबंधन पर इस भव्य कार्यक्रम ने सभी उपस्थित लोगों के दिलों में एक खास स्थान बना लिया है।
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सादर,
टीम इंडिया टुडेव,
प्रिया मेहता
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