ब्राजील की फर्नांडा ने देवभूमि में पाया पारिवारिक विवाद का समाधान, नंगे पैरों की शीतकालीन चारधाम यात्रा की

रैबार डेस्क: देवभूमि उत्तराखंड के देवत्व, आध्यात्मिक शक्ति का ब्राजील की फर्नांडा पर ऐसा असर... The post ब्राजील की फर्नांडा को पारिवारिक विवाद का देवभूमि में मिला समाधान, आध्यात्मिक शांति के लिए नंगे पैरों से की शीतकालीन चारधाम यात्रा appeared first on Uttarakhand Raibar.

Dec 12, 2025 - 18:27
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ब्राजील की फर्नांडा ने देवभूमि में पाया पारिवारिक विवाद का समाधान, नंगे पैरों की शीतकालीन चारधाम यात्रा की
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ब्राजील की फर्नांडा ने देवभूमि में पाया पारिवारिक विवाद का समाधान, नंगे पैरों की शीतकालीन चारधाम यात्रा की

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कम शब्दों में कहें तो, ब्राजील की 35 वर्षीय अधिवक्ता फर्नांडा ने उत्तराखंड की शीतकालीन चारधाम यात्रा के दौरान आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया और अपने पारिवारिक विवाद का समाधान भी खोज लिया।

दोस्ती, संतोष और आध्यात्मिकता की खोज में निकल पड़ी फर्नांडा ने उत्तराखंड की धरती पर एक गहन अनुभव किया है। वह अपनी 10 वर्षीय बेटी के साथ पारिवारिक समस्याओं से जूझते हुए आत्मिक शांति की तलाश में भारत आई थीं। उनकी यात्रा की शुरुआत हरिद्वार से हुई, जहां उन्हें हिमालय के चार धामों तक पहुंचने की इच्छा थी। हालाँकि, शीतकाल में चार धामों के दरवाजे बंद होते हैं, लेकिन उन्होंने शीतकालीन पूजा स्थलों की जानकारी हासिल की और नंगे पैर ही इन स्थलों की ओर निकल पड़ीं।

उत्तराखंड के आध्यात्मिक अनुभव

फर्नांडा ने अपनी यात्रा 5 दिसंबर को यमुनोत्री के शीतकालीन पूजा स्थल खरसाली से शुरू की, जहां उन्होंने भारतीय परंपराओं के अनुसार पूजा की। इसके बाद गंगोत्री के पूजा स्थल मुखबा गांव, केदारनाथ के ऊखीमठ, ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर और पांडुकेश्वर के योगध्यान बद्री मंदिर का दौरा किया।

हर मंदिर में फर्नांडा ने दंडवत प्रणाम किया, जिससे लोगों ने उनकी भक्ति को सराहा। हालांकि, अंग्रेजी भाषा में संचार करने में थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा। लेकिन उनका कहना है कि उत्तराखंड के मंदिरों की वास्तुकला उन्हें बहुत प्रभावित करती है। विशेष रूप से ऊखीमठ में उन्होंने अपने पारिवारिक विवाद का समाधान भी खोजा।

शाकाहारी जीवन का संकल्प

फर्नांडा के साथ यात्रा कर रहे दरभंगा बिहार के सुजीत कुमार चौधरी का कहना है कि वह प्रतिदिन स्नान के बाद मंदिरों के दर्शन करती थीं। माथे पर पूजा का तिलक लगाने के साथ वे पुजारियों के पैर छूकर आशीर्वाद लेती थीं। ज्योतिर्मठ में उन्होंने शाकाहारी जीवन अपनाने का प्रण भी लिया। ज्योतिर्मठ के प्रभारी दंडी स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने फर्नांडा की यात्रा और उनके अनुभवों के बारे में कहते हैं कि वह हिंदू धर्म के प्रति अत्यंत प्रभावित हुई हैं और यहां की धार्मिक मान्यताओं का अध्ययन कर रही हैं।

फर्नांडा की इस यात्रा ने न केवल उन्हें आध्यात्मिक शांति प्रदान की, बल्कि उनके पारिवारिक विवाद का स्थायी समाधान भी संभव बना।

आध्यात्मिकता और संतोष की इस यात्रा ने फर्नांडा को एक नई दिशा दिया है और उन्हें अपनी मान्यताओं और मूल्यों के बारे में पुनः विचार करने का अवसर प्रदान किया है। अधिक अपडेट के लिए, यहां क्लिक करें

Team India Twoday - Neha Sharma

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