मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति मानकर वजीरएक्स पर रोक

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय कानून के तहत संपत्ति माना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही क्रिप्टोकरेंसी कानूनी मुद्रा नहीं है, लेकिन इसमें संपत्ति के सभी गुण मौजूद हैं। यह फैसला एक निवेशक की याचिका पर आया, जिसके XRP क्वॉइन वजीरएक्स प्लेटफॉर्म पर साइबर हमले के बाद …

Oct 26, 2025 - 18:27
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मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति मानकर वजीरएक्स पर रोक
चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय कानून के तहत संपत्ति

मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति मानकर वजीरएक्स पर रोक

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कम शब्दों में कहें तो, मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय कानून के तहत संपत्ति के रूप में मान्यता दी है। अदालत ने कहा कि हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी कानूनी मुद्रा नहीं है, लेकिन उसमें संपत्ति के सभी गुण मौजूद हैं। यह फैसला एक निवेशक की याचिका पर आधारित है, जिसके XRP क्वॉइन को वजीरएक्स प्लेटफॉर्म पर साइबर हमले के बाद फ्रीज कर दिया गया था।

इस मामले का निपटारा जस्टिस आनंद वेंकटेश ने किया, जिन्होंने 54 पन्नों के अपने फैसले में बताया कि क्रिप्टोकरेंसी न तो भौतिक संपत्ति है और न ही पारंपरिक मुद्रा, फिर भी इसे एक प्रकार की संपत्ति के रूप में देखा जा सकता है जिसे कोई व्यक्ति अपने पास रख सकता है या ट्रस्ट में सुरक्षित कर सकता है। याचिकाकर्ता ने जनवरी 2024 में वजीरएक्स पर 1,98,516 रुपये का निवेश कर 3,532.30 XRP क्वॉइन खरीदे थे। हाल ही में जुलाई 2024 में वजीरएक्स प्लेटफॉर्म पर हुए साइबर हमले में 230 मिलियन डॉलर के Ethereum और अन्य ERC-20 टोकन चोरी कर लिए गए थे, जिसके कारण निवेशक अपने XRP क्वॉइन तक पहुँचने में असमर्थ थे।

निवेशक की याचिका और साइबर हमले की पृष्ठभूमि

निवेशक ने अदालत में दलील दी कि उसके XRP क्वॉइन चोरी हुए टोकनों से अलग हैं और वजीरएक्स उनकी संपत्ति को ट्रस्ट कस्टोडियन के रूप में संभाल रहा था। उन्होंने यह अनुरोध किया कि वजीरएक्स को उनके क्वॉइन का पुनर्वितरण करने या उसे इस्तेमाल करने से रोका जाए। वजीरएक्स की संचालक कंपनी, Zanmai Labs ने विवादित रूप से कहा कि असली मालिकाना हक सिंगापुर की Zettai Pte Ltd के पास है। यह कंपनी साइबर हमले के बाद पुनर्गठन प्रक्रिया में है और उसने यह भी दावा किया कि सिंगापुर हाईकोर्ट की अनुमति से नुकसान को सभी यूजर्स में ‘प्रो-राटा’ के आधार पर वितरित किया जाएगा।

कोर्ट का निष्कर्ष और निवेशक की सुरक्षा

हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने यह पाया कि निवेशक का लेनदेन भारत से हुआ था, इसलिए भारत की अदालत को इस मामले पर अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि ब्लॉकचेन पर मौजूद क्रिप्टो टोकन को पहचाना और ट्रांसफर किया जा सकता है, और इन्हें निजी कुंजी के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है, जो संपत्ति के गुण हैं। अदालत ने भारतीय केस लॉ में अहमद जीएच आरीफ बनाम CWT तथा जिलूभाई नानभाई खाचर बनाम स्टेट ऑफ गुजरात का संदर्भ देते हुए संपत्ति की परिभाषा को स्पष्ट किया। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसे रूस्कॉ बनाम क्रिप्टोपिया और AA बनाम व्यक्ति अनजान का उल्लेख किया गया, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति माना गया था।

XRP क्वॉइन पर न्यायालय का निर्णय

कोर्ट ने यह निर्णय निकाला कि साइबर हमले में केवल Ethereum और ERC-20 टोकन चोरी हुए थे, जबकि निवेशक के 3,532.30 XRP क्वॉइन उससे पूरी तरह अलग थे। इसके परिणामस्वरूप, वजीरएक्स का इन क्वॉइन पर कोई दावा या पुनर्वितरण योजना में शामिल करना मान्य नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि यदि सिंगापुर की पुनर्गठन योजना के तहत निवेशक की संपत्ति का मूल्य घटाया जाता है, तो वे एक कमजोर पक्ष बन जाएंगे।

कोर्ट का आदेश और भविष्य की संभावनाएँ

मद्रास हाईकोर्ट ने Zanmai Labs और उसके निदेशकों को आदेश दिया है कि वे निवेशक के 3,532.30 XRP क्वॉइन को पुनर्वितरित, बांट या पुनः आवंटित न करें, जब तक कि मध्यस्थता में अंतिम फैसला नहीं आ जाता। यह फैसला भारत में क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति के रूप में मान्यता देने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में इस क्षेत्र के लिए एक कानूनी ढांचे को मजबूत कर सकता है।

निवेशकों के लिए राहत

यह न्यायिक निर्णय उन निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है, जो क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के दौरान साइबर हमलों या प्लेटफॉर्म की मनमानी से अपनी संपत्ति खोने की संभावना से चिंतित रहते हैं। यह कदम क्रिप्टोकरेंसी के कानूनी दर्जे को स्पष्ट करने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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सादर,
टीम इंडिया ट्वोडे - श्रेया शर्मा

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