बैसाखी के पर्व पर सीएम धामी से सिख प्रतिनिधिमंडल की भेंट: धार्मिक एकता का प्रतीक

देहरादून। बैसाखी के पावन और उत्साहपूर्ण अवसर पर आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिख समुदाय के एक विशाल एवं गरिमामयी प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल में हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, उत्तराखंड किसान आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नामधारी, जनसंख्या नियंत्रण समिति के अध्यक्ष दिनेश मंसेरा […]

Apr 15, 2026 - 00:27
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बैसाखी के पर्व पर सीएम धामी से सिख प्रतिनिधिमंडल की भेंट: धार्मिक एकता का प्रतीक
देहरादून। बैसाखी के पावन और उत्साहपूर्ण अवसर पर आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिं

बैसाखी के पर्व पर मुख्यमंत्री धामी से सिख प्रतिनिधिमंडल की भेंट

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कम शब्दों में कहें तो, बैसाखी के उत्सव के खास मौके पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिख समुदाय के एक सम्माननीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस भेंट में कई प्रमुख नेता और समाज सेवी शामिल हुए, जिन्होंने सिख संस्कृति की महत्वपूर्णता और सामूहिक एकता पर जोर दिया।

देहरादून। बैसाखी के पावन और उत्साहपूर्ण अवसर पर आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सिख समुदाय के एक विशाल एवं गरिमामयी प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल में हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, उत्तराखंड किसान आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नामधारी, जनसंख्या नियंत्रण समिति के अध्यक्ष दिनेश मंसेरा तथा विधायक सुरेश गड़िया सहित अनेक प्रमुख गणमान्य नागरिक और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री धामी को पारंपरिक तरीके से सरोपा भेंट कर सम्मानित किया और बैसाखी के इस शुभ अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर समस्त वातावरण श्रद्धा, सौहार्द और उत्साह से परिपूर्ण था, तथा सिख समुदाय की समृद्ध परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा सिख समुदाय के कल्याण, सम्मान और धार्मिक आस्था के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों की चर्चा करते हुए कहा कि इससे सिख समाज को नई पहचान मिली है और सम्मान भी.

साथ ही, उन्होंने हेमकुंड साहिब के लिए लगभग ₹1740 करोड़ की लागत से प्रस्तावित रोपवे परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुविधा श्रद्धालुओं के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। इससे पर्वतीय यात्रा सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक होगी, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए।

बिंद्रा ने “वीर बाल दिवस” के आयोजन को ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि यह गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानपूर्वक मनाना सिख इतिहास और संस्कृति के प्रति देश की आस्था को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अफगानिस्तान के कंधार से श्री गुरु ग्रंथ साहिब को भारत वापस लाने का कार्य सिख समुदाय के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए सभी को बैसाखी की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि बैसाखी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, कृषि समृद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री धामी ने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि नानकमत्ता साहिब की भूमि और गुरबाणी ने उनके जीवन में विशेष स्थान बनाया है। उन्होंने बताया कि गुरबाणी के संदेशों ने उन्हें सदैव सत्य, सेवा, और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज ने राष्ट्र निर्माण में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। चाहे वो स्वतंत्रता संग्राम हो, देश की सुरक्षित सीमाओं की रक्षा, या समाज सेवा का कार्य ही क्यों न हो, हर क्षेत्र में सिख समाज का योगदान प्रेरणादायक रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिख समुदाय के प्रति कई ऐतिहासिक निर्णय लेने की बात की, जिसमें “वीर बाल दिवस” के माध्यम से साहिबजादों के बलिदान को पहचान मिलना और गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का महत्व देश स्तर पर मनाना शामिल है।

तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक – संकल्प से सिद्धि तक

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा बाबा केदारनाथ धाम से यह संकल्प दिया गया था कि “तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा“। यह संकल्प अब धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है, और उत्तराखंड में सड़क, रेल, हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन, तीर्थाटन और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं, और इसके परिणामस्वरूप राज्य विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: विकास की नई धुरी

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व की परियोजना बताया। इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय काफी कम होगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी।

हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना: आस्था और आधुनिकता का संगम

मुख्यमंत्री धामी ने हेमकुंड साहिब के रोपवे परियोजना की बात करते हुए कहा कि यह लगभग ₹1700-₹1800 करोड़ की लागत से विकसित होगी। यह परियोजना आधुनिक तकनीक से सुसज्जित होगी और पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पालन करेगी।

उन्होंने कहा कि इस रोपवे के निर्माण से श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा, साथ ही यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी।

उत्तराखंड सरकार की सिख समुदाय के लिए प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री धामी ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सिख श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर आधारभूत सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिसमें बेहतर सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, आवास और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर श्रद्धालु को उत्तराखंड में सुरक्षित, सुविधाजनक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री धामी ने बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमें एकता, परिश्रम और सेवा की भावना को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से उत्तराखंड विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखेगा।

अपने विचार साझा करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जब भी अवसर मिलता है, वे गुरुद्वारों में जाकर सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं, और इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

हम सभी को इस अवसर पर सिख समुदाय की समृद्ध परंपराओं का आदान-प्रदान कर उनके साथ खड़े होने की आवश्यकता है। इस रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए सभी ने एकजुट होना होगा।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे, सुमन कादयान

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