रामनगर में धूमधाम से मनाया गया ईद-उल-अजहा का त्यौहार, नमाज के साथ मांगी गई शांति की दुआ

रामनगर में शांतिपूर्ण माहौल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद उल अजहा का त्योहार रामनगर। रामनगर के शहरी व ग्रामीण इलाकों में ईद उल अज़हा (बकरीद) का पर्व शांतिपूर्ण…

May 29, 2026 - 09:27
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रामनगर में धूमधाम से मनाया गया ईद-उल-अजहा का त्यौहार, नमाज के साथ मांगी गई शांति की दुआ
रामनगर में शांतिपूर्ण माहौल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद उल अजहा का त्योहार रामनगर। रामनग

रामनगर में धूमधाम से मनाया गया ईद-उल-अजहा का त्यौहार

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कम शब्दों में कहें तो, रामनगर में ईद-उल-अजहा का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहां नमाज के बाद शांति की दुआ मांगी गई।

शांति और भाईचारे का संदेश

रामनगर में ईद उल अजहा (बकरीद) का पर्व एक उत्सव के रूप में मनाया गया, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में सभी समुदायों ने भाग लिया। यह पर्व न केवल त्यौहार देखाएं बल्कि आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। इस विषय में, स्थानीय नागरिकों ने त्यौहार के दौरान शांति और सद्भावना का माहौल बनाने का संकल्प लिया।

पर्व की रौनक

ईदगाह में सुबह साढ़े 7 बजे शहर के इमाम गुलाम मुस्तफा नईमी ने नमाज अता कराई। हजारों नमाज़ियों ने एक साथ मिलकर इबादत की। नमाज के बाद, आसमान की ओर हाथ उठाकर सभी ने मुल्क में अमन-चैन और कौम की तरक्की की दुआएं मांगी। इस दौरान, सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।

समुदाय की भागीदारी

ईद उल अजहा पर, कई समाजसेवी संगठनों ने जरूरतमंदों की मदद के लिए कार्यक्रम आयोजित किए। इस अवसर पर मांस वितरण की योजना बनाते समय सामाजिक उत्थान का ध्यान रखा गया। समुदाय के लोगों ने मिलकर अपने आसपास के गरीब और असहाय लोगों को ईद की खुशियों में शामिल किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

ईद के इस खास दिन को और खास बनाने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिनमें गीत, नृत्य और नाटक शामिल थे। इन कार्यक्रमों ने न केवल लोगों का मन जीत लिया, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को भी उजागर किया।

निष्कर्ष

इस प्रकार, रामनगर में ईद उल अजहा का त्यौहार एक हर्षोल्लास भरे और शांति भरे माहौल में मनाया गया। सभी के दिलों में एकता और भाईचारे का संदेश था। स्थानीय लोगों ने दिखाया कि धार्मिक त्योहार केवल पूजा नहीं, बल्कि समाज में सद्भावना और एकता का प्रतीक होना चाहिए।

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सादर, टीम इंडिया टुडे - राधिका शर्मा

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