रामनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन: उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर एवं धार्मिक वैभव पर गहन चर्चा

उत्तराखंड के सांस्कृतिक अतीत, धार्मिक वैभव और चिंतन धाराओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभरामनगर, 10 अक्टूबर 2026। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) द्वारा प्रायोजित…

Oct 11, 2026 - 09:27
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रामनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन: उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर एवं धार्मिक वैभव पर गहन चर्चा
उत्तराखंड के सांस्कृतिक अतीत, धार्मिक वैभव और चिंतन धाराओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभराम

रामनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन: उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर एवं धार्मिक वैभव पर गहन चर्चा

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कम शब्दों में कहें तो, रामनगर में 10 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के सांस्कृतिक अतीत, धार्मिक वैभव और चिंतन धाराओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया। इस संगोष्ठी का आयोजन पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) द्वारा प्रायोजित और उत्तराखंड इतिहास संकलन समिति के तत्वावधान में किया गया।

संगोष्ठी का महत्व

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक परंपराओं पर चर्चा करना था, ताकि न केवल अतीत की गहराई को समझा जा सके, बल्कि भविष्य की दिशा को भी निर्धारित किया जा सके। संगोष्ठी में सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों तथा छात्रों का participation देखने को मिला, जिन्होंने अपने विचार साझा किए और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयामों के योगदान पर रोशनी डाली।

विशेष सदस्यों की उपस्थिति

इस संगोष्ठी में कई प्रमुख विद्वानों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रमुख वक्ताओं ने उत्तराखंड की संस्कृति, उसके धार्मिक स्थानों और चिंतन धाराओं पर विचार रखे। प्रत्येक सत्र में विचारों की अदला-बदली से यह स्पष्ट हुआ कि उत्तराखंड की पहचान में इसकी सांस्कृतिक धरोहर का कितना बड़ा योगदान है।

कार्यक्रम का आयोजन

रामनगर के मयूर सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी की शुरुआत भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष ने की। उन्होंने उत्तराखंड की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य केवल संवाद स्थापित करना नहीं, बल्कि वास्तविक परिवर्तन लाना भी है।

भविष्य की दिशा

यह संगोष्ठी सुनिश्चित करेगी कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि इसे जनमानस में भी जीवित रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से नई पीढ़ी में सांस्कृतिक संवेदनाएं विकसित होंगी, जो राज्य की पहचान को और भी सशक्त बनाएंगी।

इस अवसर पर सभी ने यह संकल्प लिया कि वे उत्तराखंड की संस्कृति और धार्मिक विशेषताओं को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। इस तरह के संगोष्ठी आयोजित करना न केवल ज्ञानवर्धन का कार्य है, बल्कि यह हमें हमारे अतीत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

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संगोष्ठी की सफलताओं को देखते हुए कई अन्य शिक्षण संस्थानों ने भी इस तरह के कार्यक्रमों की योजना बनाने का मन बना लिया है, ताकि उत्तराखंड की सांस्कृतिक समृद्धि को आगे बढ़ाया जा सके।

Team India Twoday - Neha Sharma

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