अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत कुमार गौतम ने अदालत में दाखिल किया मानहानि का मुकदमा
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए कथित “VIP” आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। दुष्यंत कुमार गौतम की ओर से अदालत …
अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत कुमार गौतम ने अदालत में दाखिल किया मानहानि का मुकदमा
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कम शब्दों में कहें तो, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का केस दायर किया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चलाया जा रहा अभियान उनकी छवि को खराब कर रहा है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड एक संवेदनशील मामला है जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई आरोप उठाए हैं। इन आरोपों में दुष्यंत कुमार गौतम पर “VIP” होने का आरोप भी शामिल है। गौतम ने इन आरोपों को नकारते हुए न्यायालय का रुख किया।
अदालत में पेश किए गए सबूत
दुष्यंत कुमार गौतम ने अपनी याचिका में सितंबर 2022 के दौरान अलग-अलग तारीखों पर अपनी लोकेशन से जुड़े दस्तावेज और सोशल मीडिया रिकॉर्ड प्रस्तुत किए हैं। दस्तावेज़ों से स्पष्ट हो जाता है कि घटना के समय Gautam उस स्थान पर मौजूद नहीं थे और ना ही उनका उस स्थान से कोई संबंध था।
दुष्यंत कुमार गौतम की लोकेशन
याचिका में कहा गया है कि दुष्यंत कुमार गौतम की लोकेशन निम्नलिखित थी:
- 10 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
- 13 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
- 14 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
- 15 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
- 16 सितंबर 2022 – उत्तर प्रदेश
- 17 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
- 18 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
- 19 सितंबर 2022 – उड़ीसा
- 20 सितंबर 2022 – नई दिल्ली
इन तिथियों के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों, बैठकों और सोशल मीडिया गतिविधियों के स्क्रीनशॉट भी अदालत में प्रस्तुत किए हैं। यह सबूत दर्शाता है कि जिस समय अंकिता भंडारी से जुड़ी घटनाएँ हुईं, तब दुष्यंत कुमार गौतम अन्य राज्यों में सक्रिय थे।
“VIP नैरेटिव” को मनगढ़ंत बताया गया
दुष्यंत कुमार गौतम ने याचिका में यह भी कहा है कि कुछ राजनीतिक दलों और व्यक्तियों ने उनके नाम से “VIP” शब्द जोड़ने की कोशिश की है, जबकि ना तो चार्जशीट, ना ट्रायल और ना ही किसी न्यायिक दस्तावेज़ में उनका नाम शामिल है। उनका दावा है कि यह पूरा अभियान उनके खिलाफ एक सुनियोजित रणनीति है, जिसका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुँचाना है।
सोशल मीडिया ट्रायल पर सवाल
गौतम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चलने वाले “मीडिया ट्रायल” पर भी प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि झूठे और मानहानिकारक कंटेंट को हटाया जाए और बिना सबूत आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
आगे की प्रक्रिया
अंकिता भंडारी हत्याकांड में जहां एक ओर पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपने निष्कर्ष पर पहुँच चुकी है, वहीं दुष्यंत कुमार गौतम की मानहानि याचिका उन आरोपों पर सवाल उठाती है, जो बिना तथ्यों और जांच के सार्वजनिक मंचों पर फैलाए जा रहे हैं। अब अदालत के फैसले का इंतज़ार है कि क्या दुष्यंत कुमार गौतम अपने उपर लगे आरोपों को सही साबित कर सकेंगे।
इसके अलावा, यह मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे सोशल मीडिया का प्रभाव किसी व्यक्ति या राजनेता की छवि को प्रभावित कर सकता है।
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टीम इंडिया टुडे द्वारा, शीतल शर्मा
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