उत्तराखंड में ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’: अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण […] The post वन नेशन-वन एजुकेशन” की दिशा में उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक पहल, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखंड में ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’: अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने निवास पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर, उन्होंने कई अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि यह पहल गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में विद्यार्थियों के भविष्य को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
विकास के नए आयाम: ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड, देवभूमि होने के नाते, ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा का धनी है। यह राज्य सदियों से वैश्विक स्तर पर ज्ञान और संस्कार का संदेश फैलाते आया है। ऐसे में यह राज्य की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना का निर्णय लिया है, इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर एक नई शिक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
प्राधिकरण: एक नई शुरुआत
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह राज्य के हर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चे को समान अवसर मिले। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग ज्ञान, नवाचार और तकनीक का है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर बच्चा इन विकास की प्रक्रियाओं में शामिल हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्देश्य किसी समुदाय की पहचान को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहेंगे और विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त करेंगे। शिक्षा मात्र रोजगार के साधन नहीं, बल्कि समाज को सशक्त करने का एक महत्वपूर्ण टूल है।
समान अवसर प्रदान करने की नई दिशा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत, सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर दिए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन समूहों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, उन्हें अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा प्रणाली को एक नई दिशा दी है, जो केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, और उद्यमिता को भी प्राथमिकता देती है।
डिजिटल शिक्षा का महत्व
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण की दिशा में काम कर रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल एक मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और पारदर्शी व्यवस्था का सही प्रतिनिधित्व करेगा।
कम शब्दों में कहें तो, यह पहल केवल एक शिक्षा संस्थान की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान कर, उनके सपनों को साकार करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सद्भावनाओं के साथ, टीम इंडिया टुडे
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