एकेश्वर बीडीसी बैठक: अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कवींद्र इष्टवाल का तीखा विरोध, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

एकेश्वर। विकासखंड मुख्यालय एकेश्वर में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के अलावा कोई भी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और बैठक की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए। बैठक में …

Jun 21, 2026 - 09:27
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एकेश्वर बीडीसी बैठक: अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कवींद्र इष्टवाल का तीखा विरोध, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी
एकेश्वर। विकासखंड मुख्यालय एकेश्वर में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक उस समय विवादों मे

एकेश्वर बीडीसी बैठक: अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कवींद्र इष्टवाल का तीखा विरोध

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कम शब्दों में कहें तो, एकेश्वर विकासखंड की क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) बैठक में जिला स्तर के अधिकारियों की गैरमौजूदगी ने विवाद को जन्म दिया। जिलाधिकारियों के बिना बैठक के उद्देश्य पर सवाल उठाए गए हैं।

एकेश्वर। विकासखंड मुख्यालय एकेश्वर में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक उस समय गरमा गई जब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के अलावा कोई भी जिला स्तर का अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति को भर्त्सना की और यह सवाल उठाया कि यदि जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं, तो बैठक क्या केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है?

कवींद्र इष्टवाल का प्रभावी प्रदर्शन

बैठक में जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र इष्टवाल ने क्षेत्र की समस्याओं को उजागर करते हुए कहा कि यहां सड़क, पेयजल और विकास कार्यों से संबंधित कई मुद्दे हैं, जिन पर प्रशासन की कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि बैठक में अधिकारियों की अनुपस्थिति ही रहेगी, तो समस्याओं के समाधान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

जनसमस्याओं की अनदेखी

इष्टवाल ने अपनी बातों में यह भी जोड़ा कि क्षेत्र में सड़क और पानी के गंभीर मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे पड़े हैं, परंतु इसकी ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब सरकारी अधिकारी बैठक में भाग ही नहीं लेते हैं, तो आगे की कार्यवाही करना संभव नहीं है।

बीडीओ का विवादास्पद बयान

बैठक में एक और विवाद तब उठा जब इष्टवाल ने आरोप लगाया कि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने उन्हें कहा कि उन्होंने जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि को बैठक में शामिल होने का अधिकार नहीं दिया है। इस पर कवींद्र इष्टवाल ने विरोध दर्ज कराया। सीडीओ ने इस पर स्पष्टीकरण दिया कि जिला पंचायत सदस्य का अधिकृत प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित हो सकता है, जो कि बीडीओ की जानकारी गलत थी।

दबाव का परिणाम

इस पर इष्टवाल ने सीडीओ से माँग की कि सभी संबंधित अधिकारियों को इस विषय में स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याएं न हों। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया और यह स्पष्ट किया कि यह लोकतांत्रिक प्रणाली की मूल भावना है।

सरकारी योजनाओं पर प्रश्नचिन्ह

बैठक में उपस्थित कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रतिनिधि को भी इष्टवाल ने से घेरते हुए कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली में कमी है। उन्होंने विशेष तौर पर जल जीवन मिशन जैसे योजनाओं में खामियों को रेखांकित किया, जिनके प्रभाव से अभी भी कई गांवों में पेयजल की समस्या बनी हुई है।

प्रशासनिक उदासीनता का आरोप

इष्टवाल ने जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान ही नहीं हो रहा है, तो यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन का रु ख गंभीरता से नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बैठकें केवल औपचारिकता बन गई हैं, जबकि इनका मूल उद्देश्य जनहित और विकास कार्यों की समीक्षा करना है।

भविष्य के लिए अपेक्षाएँ

उन्होंने प्रशासन से यह भी माँग की कि सभी संबंधित जिला स्तर के अधिकारी भविष्य में बीडीसी बैठकों में अनिवार्यतः उपस्थित रहें ताकि विकास और जनहित से संबंधित मुद्दों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

जनप्रतिनिधियों की ओर से एकजुटता

बैठक के दौरान कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि अगर विकास योजनाओं और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारी मौजूद नहीं होंगे, तो कैसे काम संभव होगा।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को सुनता है या फिर हालात यथा स्थिति पर बने रहेंगे।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे - सुमन कुमारी

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