विकास और संरक्षण: उपराष्ट्रपति का महत्वपूर्ण संदेश IFS प्रशिक्षुओं के लिए
देहरादून: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2025-2027 बैच के परिवीक्षार्थियों और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को संतुलित […] The post विकास और संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, उपराष्ट्रपति ने IFS प्रशिक्षुओं को दिया मंत्र first appeared on Vision 2020 News.
विकास और संरक्षण: उपराष्ट्रपति का महत्वपूर्ण संदेश IFS प्रशिक्षुओं के लिए
कम शब्दों में कहें तो, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा (IFS) के प्रशिक्षुओं को बताया कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाकर देश की पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
देहरादून: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2025-2027 बैच के परिवीक्षार्थियों और रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में प्रशिक्षु अधिकारियों का देश की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान होगा।
विकसित भारत@2047 में वन सेवा की अहम भूमिका
उपराष्ट्रपति ने कहा, "भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकताओं पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारतीय वन सेवा के योगदान के महत्व को रेखांकित किया।
विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
उपराष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। "हमें दोनों के बीच संतुलन बना कर चलने की जरूरत है," उन्होंने कहा। अधिकारियों को संरक्षण और विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका के बीच सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान किया।
वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के ज्ञान का सम्मान करें
उन्होंने स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी महत्वपूर्ण बताया। इन समुदायों ने सदियों से जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के साथ जीवन यापन किया है। उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से ऐसे अनुभवों और ज्ञान को संरक्षण नीतियों में शामिल करने की अपील की।
सत्यनिष्ठा से समझौता नहीं किया जा सकता
उपराष्ट्रपति ने लोक सेवा में सत्यनिष्ठा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेते समय संविधान और कानून के आधार पर काम करें।
वानिकी में आधुनिक तकनीक का महत्व
उपराष्ट्रपति ने वानिकी क्षेत्र में रिमोट सेंसिंग, GIS, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा आधारित प्रणालियों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान को भारत के पारंपरिक ज्ञान के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है।
वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सराहा और बताया कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह नारी शक्ति की अहमियत और समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।
पद से नहीं, योगदान से हो करियर का आकलन
उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने करियर की सफलता का आकलन केवल पद या जिम्मेदारियों से न करें, बल्कि पुनर्स्थापित वनों, संरक्षित वन्यजीवों और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ी गई धरोहर के आधार पर अपनी उपलब्धियों को मापें।
टीम भावना से ही मजबूत संस्थानों का निर्माण
उपराष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्तिगत उत्कृष्टता की बजाय टीम की उत्कृष्टता पर जोर देना चाहिए, क्योंकि यही मजबूत संस्थानों और राष्ट्र का निर्माण करता है।
कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे।
संदेश देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “राष्ट्र प्रथम।” यह सभी के लिए प्रेरणादायक और दिशा देने वाला है।
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
For more updates, visit https://indiatwoday.com.
Team India Twoday - नीतू शर्मा
What's Your Reaction?