हरिपुर कालसी में 2100 दीपों की रोशनी से चमका यमुना तट, मुख्यमंत्री धामी ने मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण

कालसी। हरिपुर कालसी में मां यमुना के पावन तट पर बुधवार को आस्था, आध्यात्मिकता और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र को कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास की सौगातें देते हुए माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण तथा माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास …

Sep 18, 2026 - 09:27
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हरिपुर कालसी में 2100 दीपों की रोशनी से चमका यमुना तट, मुख्यमंत्री धामी ने मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण
कालसी। हरिपुर कालसी में मां यमुना के पावन तट पर बुधवार को आस्था, आध्यात्मिकता और संस्कृति का भव्य

हरिपुर कालसी में 2100 दीपों की रोशनी से चमका यमुना तट

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कम शब्दों में कहें तो, हरिपुर कालसी में यमुना तट पर आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण करते हुए एक नई आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ किया।

कालसी। हरिपुर कालसी में बुधवार को माँ यमुना के पावन तट पर आस्था, आध्यात्मिकता और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र को कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास की सौगातें देते हुए माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण तथा माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर माँ यमुना के तट पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के साथ दीप प्रज्वलित किया। कार्यक्रम में कुल 2100 दीप प्रज्वलित किए गए, जिससे यमुना तट रोशनी से जगमगा उठा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ माँ यमुना की आरती में भी प्रतिभाग किया।

Yamuna Taat Celebration

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास का नया अध्याय

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कालसी की धरती इतिहास, आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है। माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और यमुना आरती जैसे आयोजन क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी कालसी के धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार जौनसार-बावर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि लाखामंडल सहित जौनसार क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है।

स्थानीय आर्थिकी को मिलने वाले लाभ

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास नहीं, बल्कि इन परियोजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुँचाना भी है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन, खान-पान और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

Yamuna Aarti

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प

उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर की लोक संस्कृति, परंपराएं, वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य उत्तराखंड की महत्वपूर्ण विरासत हैं। विकास कार्यों के साथ इस सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।

आस्था और विकास का संतुलन

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है। चारधाम के साथ-साथ प्रदेश के अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कालसी, हनोल, लाखामंडल और जौनसार-बावर क्षेत्र को धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जुड़े और इससे स्थानीय रोजगार तथा क्षेत्रीय आर्थिकी को मजबूती मिले।

कार्यक्रम के दौरान विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, अन्य जनप्रतिनिधि, साधु-संत तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

इसके अतिरिक्त, इस आयोजन के माध्यम से धर्म, संस्कृति और पर्यटन को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को भी लाभ होगा।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे (मिक्की शर्मा)

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