उत्तरकाशी: 13 वर्षीय लड़के ने 9 वर्षीय बच्ची के प्रति दुष्कर्म किया, आरोपी बाल सुधार गृह भेजा गया

रैबार डेस्क: गंदी आदतें और पोर्न की लत न सिर्फ सामाजिक मूल्यों को बरबाद कर... The post उत्तरकाशी: पहले पोर्न देखा, फिर 13 साल के लड़के ने 9 साल की बच्ची से किया दुष्कर्म,आरोपी बाल सुधार गृह भेजा गया appeared first on Uttarakhand Raibar.

Jun 19, 2026 - 00:27
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उत्तरकाशी: 13 वर्षीय लड़के ने 9 वर्षीय बच्ची के प्रति दुष्कर्म किया, आरोपी बाल सुधार गृह भेजा गया
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उत्तरकाशी में शर्मनाक घटना: 13 वर्ष के लड़के ने 9 वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म किया

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तरकाशी में एक गंभीर घटना सामने आई है जिसमें एक 13 वर्षीय लड़के ने 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म को अंजाम दिया। इस मामले ने समाज में व्याप्त गंदे आदतों और पोर्न के प्रभाव को उजागर किया है।

उत्तरकाशी के पुरोला ब्लॉक का यह मामला अत्यंत दुखद और चिंतनीय है। ऐसे समय में जबकि समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, एक 13 वर्षीय लड़का, जो कक्षा छह में पढ़ रहा है, ने नाबालिग बच्ची पर हैवानियत का हमला किया। इस मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी को बाल सुधार गृह भेज दिया है।

घटना का विवरण

यह घटना बुधवार दोपहर की है, जब बच्ची की मां पास के गांव में मेले में गई थी और उसके पिता खेतों में काम कर रहे थे। इस दौरान, आरोपी लड़का और बच्ची गांव के मंदिर के परिसर में खेल रहे थे। खेल-खेल में आरोपी ने बच्ची को मंदिर के पिछले हिस्से में ले जाकर दुष्कर्म किया।

पुलिस और स्वास्थ्य सेवाएँ

यह मामला तब उजागर हुआ जब बच्ची के पिता काम से घर लौटे और उन्होंने देखा कि उनकी बच्ची खून से लथपथ है। पूछताछ के बाद बच्ची ने अपने परिजनों को पूरी घटना बताई। उसके बाद परिजनों ने बच्ची को उपजिला चिकित्सालय पुरोला पहुंचाया और पुलिस को सूचित किया। थानाध्यक्ष दीपक सिंह कठैत के अनुसार, आरोपी और बच्ची दोनों नाबालिग हैं एवं पीड़िता के पिता की तहरीर पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

आरोपी का हाल

आरोपी बच्चे को पुलिस ने पूछताछ के बाद बाल सुधार गृह डुंडा उत्तरकाशी भेज दिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि घटना के समय आरोपी ने फोन पर आपत्तिजनक सामग्री देखी थी, जिसे उसके व्यवहार में बदलाव का एक कारण माना जा रहा है। दोनों छात्र अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ते हैं, जहां 13 वर्षीय लड़का कक्षा छह में और 9 वर्षीय बच्ची चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रही है।

समाज पर प्रभाव

इस घटना ने समाज को फिर से एक बार यह सोचने पर मजबूर किया है कि बच्चों पर पॉर्नोग्राफी और गंदे कंटेंट का क्या प्रभाव पड़ता है। ऐसा मानना है कि यह न केवल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उनके व्यवहार में भी बेहद नकारात्मक बदलाव ला सकता है। शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों को बच्चों की सुरक्षा और उनके सही मानसिक विकास के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

इसके अलावा, ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए सरकर को भी सख्त कानून बनाने और उसके कार्यान्वयन पर ध्यान देना होगा। भविष्य में बच्चों को इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों से बचाने के लिए शिक्षा और जागरूकता के कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस कहानी ने हमें यह सिखाया है कि समाज में सुधार लाने के लिए हमें सचेत रहना होगा और बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना होगा। अधिक जानकारी के लिए, हमारे पोर्टल पर जरूर विजिट करें।

सादर, टीम इंडिया ट्वोडे - दीप्ति मेहरा

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