उत्तराखंड को मिलेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केन्द्र – धामी

देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने […]

May 6, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड को मिलेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केन्द्र – धामी
देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हर

उत्तराखंड बनेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र – धामी

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड को ज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनाने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। उन्होंने हरिद्वार में स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास पर चर्चा की। इस योजनाओं के तहत, भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध को एकीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है।

देहरादून। मंगलवार को, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें ऋषिकुल, हरिद्वार में स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास और विस्तार की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बताया कि उत्तराखंड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन का भी केंद्र है। उन्होंने कहा कि ऋषिकुल में इस संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

संस्थान को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान से जोड़ने की योजना

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का कार्य तुरंत ही आरंभ किया जाए और इस कार्य को कुंभ मेले से पहले पूरा करने का प्रयास किया जाए। राज्य के पर्यटन विभाग को नोडल विभाग के रूप में कार्य करने का निर्देश भी दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को यह भी कहा कि संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें आयोजित की जाएं। बैठक में यह भी कहा गया कि विकास के साथ-साथ विरासत के संरक्षण पर ध्यान दिया जाए और राज्य के विभिन्न जनपदों की लोक कला को भी शामिल किया जाए।

वैदिक गणित और प्राचीन विज्ञान का अध्ययन

मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी निर्देशित किया कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र और पर्यावरण विज्ञान पर आधारित आधुनिक अध्ययन और शोध की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्राचीन भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान और कृषि विज्ञान से जुड़े विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान काफी विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाना चाहिए।

संस्थान का उद्देश्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन और मानवीय मूल्यों को समाज में फैलाना आवश्यक है। यह संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का केंद्र बनेगा। उन्होंने डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं और ई-लर्निंग सुविधाओं की व्यवस्था का भी निर्देश दिया।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग और ध्यान जैसे भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक क्षेत्र में वेद और उपनिषद के अध्ययन, भारतीय दर्शन और चेतना के विचार, स्वास्थ्य विज्ञान और भारतीय कला एवं संस्कृति का विकास शामिल होगा।

मुख्यमंत्री धामी की यह पहल न केवल उत्तराखंड के लोगों के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणादायक कदम है। इससे भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति को एक नई पहचान मिलेगी।

आवास और शहरी विकास के प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, और कई अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी इस बैठक में शामिल हुए।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे - ऋतु शर्मा

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