देहरादून में मेडिकल स्टोर से 20,000+ प्रतिबंधित गोलियां बरामद, एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज

देहरादून।  प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान छेड़ दिया है। सचिव स्वास्थ्य व आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सचिन कुर्वे के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में प्रदेशभर में औषधि निरीक्षण की विशेष कार्रवाई चल रही है। इसी अभियान के तहत कुमाऊँ मंडल […]

Feb 26, 2026 - 00:27
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देहरादून में मेडिकल स्टोर से 20,000+ प्रतिबंधित गोलियां बरामद, एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज
देहरादून।  प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभि

देहरादून में मेडिकल स्टोर से 20,000+ प्रतिबंधित गोलियां बरामद, एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में एक मेडिकल स्टोर से 20,142 प्रतिबंधित गोलियां बरामद की गईं हैं, जिसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई अवैध नशीली दवाओं के कारोबार के खिलाफ सरकार के चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।

देहरादून। उत्तराखंड में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को रोकने के लिए सरकार ने जो कठोर कदम उठाए हैं, उसी के तहत पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया। इस अभियान में स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे के निर्देशों पर प्रदेशभर में औषधि निरीक्षण की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में, कुमाऊँ मंडल में एक मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर 20,000 से अधिक प्रतिबंधित दवाएं बरामद की गईं।

मेडिकल स्टोर से बरामद नशीली दवाओं का जखीरा

सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने उधम सिंह नगर के थाना पुलभट्टा क्षेत्र में SK मेडिकल स्टोर पर छापा मारा। इस छापेमारी में ट्रामाडोल (Tramadol) और अल्प्राजोलम (Alprazolam) की 20,142 टैबलेट्स और 50 ट्रामाडोल इंजेक्शन बरामद किए गए। इन दवाओं की बिक्री बिना वैध पर्चे के पूरी तरह से प्रतिबंधित है। मेडिकल स्टोर का संचालक, शकूर खान, जिसके खिलाफ अब एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत मामला दर्ज करा दिया गया है, को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रॉबस्ट इंस्पेक्शन प्रणाली: क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण

स्वास्थ्य विभाग ने इस बार निरीक्षण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तीन विशेष निरीक्षण दल गठित किए हैं, जो अपने गृह जनपद से बाहर जाकर निरीक्षण करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार की मिलीभगत के खतरे को समाप्त करना है। यह पहल इस बात को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि सभी मेडिकल स्टोर संचालक नियमों का पालन करें। जाँच अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में व्यवस्था को सख्त किया जाएगा और औचक निरीक्षण भी जारी रहेंगे।

युवाओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की संकल्पना

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं का misuse खासकर युवाओं के बीच में बढ़ता जा रहा है। ऐसे दवाओं के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं और इसी वजह से सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीतियों को और अधिक सख्त किया है। कुमाऊँ में हुई यह कार्रवाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

नशे के नेटवर्क पर नकेल

यह कार्रवाई नशे के अवैध व्यापार पर एक बड़ी चोट मानी जा रही है। जिस प्रकार से स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने इसे अंजाम दिया है, उससे साफ है कि अब सरकार नशीली दवाओं के कारोबार को समाप्त करने के लिए निर्णायक कदम उठाने के लिए तत्पर है।

सरकारी अधिकारियों के बयान

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि "प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है।" इसका उद्देश्य युवाओं पर नशा करने वाली दवाओं का दुष्प्रभाव रोकना है। उन्होंने कहा कि प्राप्त होने वाली सूचनाओं के आधार पर निरीक्षण जारी रहेगा।

अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने भी बयान में कहा कि "जिन मेडिकल स्टोर संचालकों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"

यह अभियान न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में नशे के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने में भी मदद करेगा। इस मुद्दे पर सही कदम उठाने के लिए सभी को एकजुट होना आवश्यक है।

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Team India Twoday, सुमन कश्यप

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