उत्तराखंड में मातृ स्वास्थ्य हेतु नई ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट प्रणाली लागू

  देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी की अध्यक्षता में आज “मातृ रेफरल ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट सिस्टम” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मातृ रेफरल प्रणाली को सुदृढ़ बनाने, रेफरल से पूर्व गर्भवती महिलाओं के उचित स्थिरीकरण (Stabilization), रेफर करने एवं प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य […]

Jun 21, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड में मातृ स्वास्थ्य हेतु नई ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट प्रणाली लागू
  देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी की अध्यक

उत्तराखंड में मातृ स्वास्थ्य हेतु नई ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट प्रणाली लागू

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए नई ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी और समर्पित होंगी।

देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी की अध्यक्षता में आज “मातृ रेफरल ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट सिस्टम” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मातृ रेफरल प्रणाली को बेहतर बनाने, गर्भवती महिलाओं के लिए उचित स्थिरीकरण (Stabilization), और स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रभावी संवाद व्यवस्था की चर्चा की गई।

बैठक में डॉ. अजय आर्य, निदेशक चिकित्सा शिक्षा; डॉ. रश्मि पंत, निदेशक एनएचएम उत्तराखंड; डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम; डॉ. मनोज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून; डॉ. मनु जैन, पीएमएस, जिला चिकित्सालय देहरादून; डॉ. जया चतुर्वेदी, कार्यकारी विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, एम्स ऋषिकेश; डॉ. गीता जैन, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज; डॉ. वंदना, तथा अन्य प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित थे।

इस बैठक के दौरान प्रस्तावित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) के अनुसार, मातृ केस के लिए एक Advance Communication System अनिवार्य किया जाएगा, जिससे कि स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सूचनाओं का सटीक साझा किया जा सकेगा। इससे न केवल रेफरल की प्रक्रिया को संजीवनी मिलेगी, बल्कि ऑडिट एवं निगरानी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि यह प्रक्रिया मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी सुझावों को SOP में समाहित किया जाए और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

इस नई पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करना, आपातकालीन प्रसूति सेवाओं तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके माध्यम से मातृ मृत्यु दर को कम करने और गंभीर जटिलताओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।

बैठक के अंत में, विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त सुझावों के आधार पर एक SOP तैयार किए जाने का निर्णय लिया गया। इस नई प्रणाली के जरिए, स्वास्थ्य सेवाओं की विफलताओं की पहचान करके, समयबद्ध सुधारात्मक उपाय जड़ी जाएगी, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की संभावना है।

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साक्षात्कार एवं संवाद के जरिए स्पष्टता सुनिश्चित करने का प्रयास जारी है।

आपका साथ,

Team India Twoday - स्नेहा कुमारी

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