उत्तराखंड वेतन विवाद: हाईकोर्ट ने प्रवक्ताओं को दी राहत, आदेश पर लगी रोक

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा…

Jan 9, 2026 - 18:27
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उत्तराखंड वेतन विवाद: हाईकोर्ट ने प्रवक्ताओं को दी राहत, आदेश पर लगी रोक
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं को बड़ी राहत दे

उत्तराखंड वेतन विवाद: हाईकोर्ट ने प्रवक्ताओं को दी राहत, आदेश पर लगी रोक

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 400 से अधिक प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान की पुनर्निर्धारण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करते हुए उनके चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने का फैसला किया है। यह फैसला वित्त सचिव द्वारा 18 दिसंबर, 2025 को जारी आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगाते हुए लिया गया। न्यायालय ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल माह में निर्धारित की गई है, जिससे प्रवक्ताओं को अनिश्चितता से राहत मिलने की उम्मीद है।

क्या है इस विवाद का मूल?

यह विवाद पिछले कुछ समय से चल रहा है, जहां प्रवक्ताओं की नियुक्तियों के वेतनमान को संशोधित करने का आदेश विवादास्पद बना हुआ है। शिक्षण संस्थानों में कार्यरत प्रवक्ताओं ने सरकार के इस निर्णय को उनके अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा है। उनका कहना है कि प्रदर्शन किए बिना, प्रदर्शनकारी शिक्षकों का चयन वेतनमान कम करना अनुचित है। उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के बीच जद्दोजहद जारी है।

न्यायालय का आदेश और उसके प्रभाव

न्यायालय ने साफ किया है कि जिन प्रवक्ताओं का वेतनमान प्रभावित हो रहा है, उन्हें बिना वैकल्पिक समाधान के इस मामले में उत्तरदायित्व से मुक्त किया जाएगा। कई प्रवक्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी आर्थिक सुरक्षा की चिंता खत्म हो गई है। इसके अतिरिक्त, प्रवक्ताओं ने न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए न्याय की उम्मीद जताई है।

प्रवक्ताओं के इस आंदोलन के आधार पर सरकार को जल्द ही कोई ठोस कदम उठाना होगा ताकि कार्यरत शिक्षकों की स्थिति स्पष्ट हो सके। राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि प्रवक्ताओं को उचित वेतनमान मिले।

आगे की कार्रवाई

जैसे ही मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी, प्रवक्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद की संभावना है। उच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद, सरकार को अपने कदमों पर सावधानीपूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। यह एक ऐसा अवसर है जब सभी पक्षों को एक साथ आकर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए।

कुल मिलाकर, उच्च न्यायालय का यह अंतरिम आदेश शिक्षकों की स्थिति को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट करता है, जो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने का अवसर देता है। ऐसे मामलों में न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और इससे राज्य में शिक्षा के पूरे तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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सौजन्य: टीम इंडिया टुडे, राधिका शर्मा

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