उत्तराखण्ड बाल कल्याण परिषद में नई कार्यकारिणी का गठन, राज्यपाल का महत्वपूर्ण संदेश बच्चों को विकसित भारत के लिए तैयार करने की आवश्यकता
देहरादून : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को लोक भवन में आयोजित उत्तराखण्ड राज्य बाल कल्याण परिषद की 17वीं बैठक में बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बाल कल्याण केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि एक पवित्र दायित्व है। उन्होंने कहा ऐसे बच्चे, […] The post उत्तराखण्ड राज्य बाल कल्याण परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन, राज्यपाल बोले- बच्चों को विकसित भारत के मुताबिक करना होगा तैयार first appeared on Vision 2020 News.
उत्तराखण्ड बाल कल्याण परिषद में नई कार्यकारिणी का गठन
देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य बाल कल्याण परिषद की 17वीं बैठक में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बच्चों के समग्र विकास हेतु समाज की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाल कल्याण केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि समाज का एक पवित्र दायित्त्व है। ऐसे बच्चों, जिनके पास सुविधाओं का अभाव है, उनके उत्थान के लिए समाज को संवेदनशील और सक्रिय प्रयास करने की आवश्यकता है।
बाल कल्याण परिषद की कार्यप्रणाली में नवाचार
राज्यपाल ने बाल कल्याण परिषद के सदस्यों से अपेक्षाएं व्यक्त कीं कि वे उत्साह, सक्रिय सहभागिता और समर्पण के साथ काम करें। उन्होंने बताया कि परिषद जैसी ऐतिहासिक संस्थाओं को समय के साथ नए दृष्टिकोण और कार्यशैली के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, अधिकार और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
जिला स्तर पर प्रभावी बाल कल्याण केंद्र का विकास
राज्यपाल ने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में बाल कल्याण गतिविधियों को सुदृढ़ बनाने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी “बाल कल्याण केंद्र” स्थापित किए जाएं, ताकि जरूरतमंद बच्चों को योजनाओं और सहायता का लाभ बेहतर तरीके से मिल सके। उन्होंने जिलाधिकारियों को इस दिशा में समन्वय स्थापित करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा।
कार्रवाई योजना की तैयारियों का निर्देश
राज्यपाल ने बैठक में मौजूद नव नियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को एक माह के भीतर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन मात्र एक प्रारंभिक कदम है, असली आवश्यकता यह है कि बच्चों को 21वी सदी की चुनौतियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के लिए तैयार किया जाए। सकारात्मक सोच और सामाजिक सहयोग अधिक महत्वपूर्ण हैं।
जनभागीदारी के लिए सीएसआर और समाजसेवी संस्थाओं की सहयोग की आवश्यकता
राज्यपाल ने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) और समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से बाल कल्याण गतिविधियों को और प्रभावशाली बनाने के मुद्दे पर भी जोर दिया। यह आवश्यक है कि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर बच्चों के विकास और कल्याण में सहायता करें। उन्होंने बताया कि जल्द ही पुनः एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी जहाँ बाल कल्याण के क्षेत्र में ठोस और प्रभावी निर्णय लिए जाएंगे।
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड बाल कल्याण परिषद की बैठक में राज्यपाल ने बच्चों के विकास के लिए समाज की सामूहिक जिम्मेदारी को 강조 किया, साथ ही समर्पित कार्य करने की प्रेरणा भी दी। यह कार्ययोजना प्रदेश के भविष्य के निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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टिम इंडिया टुडेज द्वारा: सुमन शर्मा
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