गुलदार के हमले से महिला की जान बचाने वाले युवा की सराहना, पौड़ी में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
रैबार डेस्क: पौड़ी जिले में गुलदार और का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा।... The post शाबाश अंकित, गुलदार से बचाई महिला की जान, पोखड़ा ब्लॉक में गुलदार ने महिला को किया घायल, गंभीर हालत में एम्स रेफर appeared first on Uttarakhand Raibar.
गुलदार के हमले से महिला की जान बचाने वाले युवा की सराहना, पौड़ी में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष
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कम शब्दों में कहें तो, पौड़ी जिले में गुलदार के आतंक ने एक बार फिर मानव जीवन को संकट में डाल दिया। जवान अंकित की बहादुरी ने इस बार एक महिला की जान बचाई, जब उसे जंगल में गुलदार ने हमला कर दिया। इस घटनाक्रम ने फिर से वन्य जीवों और मानवों के बीच संघर्ष की गंभीरता को उजागर किया है।
पौड़ी जिले का पोखड़ा ब्लॉक एक बार फिर से गुलदार के खतरों का सामना कर रहा है। इस बार गुलदार ने कंचन देवी (36) पर हमला किया, जो अपने गांव में घास काट रही थीं। घटना बुधवार को लगभग 11.15 बजे हुई, जहां अचानक गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। महिला की चीख सुनकर गांव के बहादुर युवा अंकित और जयदीप ने वहां पहुंचकर साहस का परिचय दिया। दोनों ने पत्थर फेंककर गुलदार को दूर भगाया और महिला की जान बचाई।
भारी आघात के बाद, घायल कंचन देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखड़ा में प्राथमिक उपचार दिया गया, परंतु उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें कोटद्वार अस्पताल में भेजा गया। वहां से उनका एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद क्षेत्र के लोग अत्यधिक आक्रोशित हो गए और उन्होंने रेंज ऑफिसर को बंधक बना लिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों ने वन विभाग से मांग की है कि गांव में रात्रि गश्त बढ़ाई जाए और गुलदार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि हाल के कुछ महीनों में जंगली जानवरों की आवाजाही में तेजी आई है, जिससे उन्हें घर से बाहर निकलना कठिन हो गया है।
पौड़ी जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 6 दिसंबर को, गजल्ट गांव में एक गुलदार ने 42 वर्ष के व्यक्ति की जान ले ली थी, जिसके बाद जयहरीखाल ब्लॉक में भी एक बाघ ने एक महिला को मार डाला था। हाल ही में गढ़वाल कमिश्नर ने मृतक के परिवार से मिलने के दौरान वहां से एक किलोमीटर दूर सिरोली गांव में भी गुलदार ने बकरियों पर हमला किया।
हालांकि, मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को रोकने में प्रशासन जनसंख्या को शांत करने में असफल साबित हो रहा है। यह समय है कि इस मुद्दे पर ठोस नीतियां बनाईं जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निजात पाई जा सके।
इस घटना ने न केवल हमारी जागरूकता को बढ़ाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि लोगों को अपने ही गांव में किस प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, ग्रामीणों को चाहिए कि वे स्थानीय वन विभाग के साथ मिलकर एक योजना बनाएं, जिससे इस तरह की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
फिलहाल, यह घटना स्थानीय लोगों में कटुता और भय का कारण बन गई है। ऐसे समय में जब हम वन्य जीवों के अधिकारों की बात करते हैं, यह भी आवश्यक है कि हम मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
अंत में, अंकित और जयदीप जैसे स्थानीय नायक हमारे समाज के वास्तविक हीरो हैं, जिन्होंने खतरे का सामना करके किसी की जान बचाई। हमें उनके साहस को सराहना चाहिए।
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सादर, टीम इंडिया टुडे - प्रियंका शर्मा
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