ग्रीन फील्ड स्कूल के वार्षिकोत्सव में समावेशी शिक्षा और हिमालय संरक्षण को मिली सराहना
देहरादून। डालनवाला स्थित ग्रीन फील्ड स्कूल के वार्षिकोत्सव में शनिवार को मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार की उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष एवं डीएवी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन तथा विशिष्ट अतिथि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने शिरकत की। डॉ. देवेंद्र भसीन ने अपने संबोधन में ग्रीन फील्ड स्कूल को …
ग्रीन फील्ड स्कूल के वार्षिकोत्सव में समावेशी शिक्षा और हिमालय संरक्षण को मिली सराहना
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के ग्रीन फील्ड स्कूल के वार्षिकोत्सव में उच्च शिक्षा और समावेशी शिक्षा पर जोर दिया गया।
देहरादून। डालनवाला स्थित ग्रीन फील्ड स्कूल में शनिवार को वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार की उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष एवं डीएवी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन और विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रीन फील्ड स्कूल के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का एक नया आयाम प्रस्तुत किया।
समावेशी शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण
अपने संबोधन में डॉ. देवेंद्र भसीन ने ग्रीन फील्ड स्कूल को समावेशी शिक्षा का एक बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सामान्य और दिव्यांग बच्चों को एक स्थान पर पढ़ाना और सभी गतिविधियों में शामिल करना, न केवल अद्वितीय है, बल्कि यह अन्य स्कूलों के लिए भी अनुकरणीय है। उन्होंने दिव्यांग बच्चों की प्रस्तुतियों की प्रशंसा की और विद्यालय प्रबंधन को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
हिमालय संरक्षण की आवश्यकता
विशिष्ट अतिथि सूर्यकांत धस्माना ने छात्रों द्वारा प्रस्तुत नाटिका "हिमालय बचाओ" की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों ने गंगा, यमुना, शारदा और अन्य नदियों के प्रदूषण, अवैध कटान और ग्लेशियर पिघलने जैसे गंभीर मुद्दों को जिस संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया, वह कौतुक करने योग्य है। उन्होंने उत्तराखंड को एशिया का जल भंडार बताते हुए, इन नदियों के अस्तित्व को बचाने की जिम्मेदारी सभी पर डाली।
पलायन का संकट
सूर्यकांत धस्माना ने राज्य की स्थापना के 25 वर्ष बाद भी बढ़ते पलायन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी ही पलायन का मुख्य कारण है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि हमें पहाड़ों की जनसंख्या को बनाए रखना है, तो हमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार करना होगा।
दिव्यांग बच्चों का प्रदर्शन
कार्यक्रम की शुरुआत दिव्यांग बच्चों के नृत्य और कैटवॉक से हुई, जिसने दर्शकों की ताली और तालियों का नजारा प्रस्तुत किया। कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों ने "हिमालय बचाओ" और "पलायन की पीड़ा" जैसे संदेशात्मक लघु नाटकों का उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसे अभिभावकों ने दिल से सराहा।
सम्मान और आभार
कार्यक्रम के अंत में, विद्यालय निदेशक डॉ. अनिल जग्गी और प्रधानाचार्या डॉ. रीना जग्गी ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। समारोह के समापन पर, शुभांग जग्गी ने सभी अतिथियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया और अगले वार्षिकोत्सव की अपेक्षा जताई।
यह समारोह केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं था, बल्कि यह समावेशी शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता का एक आदर्श उदाहरण था। समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा के माध्यम से हम अपनी संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।
इस प्रकार, ग्रीन फील्ड स्कूल का वार्षिकोत्सव समावेशी शिक्षा और हिमालय संरक्षण के विचारों को आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास साबित हुआ।
फिर से, ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है, जो हमारे बच्चों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करें। अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें.
सादर,
टीम इंडिया टुडे, नेहा अग्रवाल
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