डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ समारोह में हरियाणवी सिंगर ने गाली गलौच की, मंच पर नेता बने दर्शक
रैबार डेस्क: देहरादून के डीएवी कॉलेज का छात्र संघ समारोह लगातार विवादों में बना हुआ... The post DAV कॉलेज के छात्रसंघ समारोह में हरियाणवी सिंगर ने भरे मंच से की गाली गलौच, मंच पर देखते रहे नेता appeared first on Uttarakhand Raibar.
डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ समारोह में हरियाणवी सिंगर ने गाली गलौच की, मंच पर नेता बने दर्शक
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के डीएवी कॉलेज का छात्र संघ समारोह विवादों से भरा रहा। इस समारोह में हरियाणवी गायक मासूम शर्मा ने मंच से अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जबकि वहाँ मौजूद नेता खड़े देखते रहे।
रैबार डेस्क: डीएवी कॉलेज का छात्र संघ समारोह हाल ही में फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने समारोह छोड़ा, छात्रों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। घटनाक्रम के दौरान एक छात्र को चाकू लगने की खबर भी सामने आई है।
छात्रसंघ के इस समारोह में हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा को बुलाया गया था, जिन्होंने अपने कार्यक्रम के दौरान बेहद विवादास्पद भाषा का प्रयोग किया। इस समय का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें मासूम खुलकर गालियाँ देते हुए नजर आ रहे हैं।
क्या सच में शिक्षा के मंदिर में हो रही है ऐसी अभद्रता?
मासूम शर्मा ने अपने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वह एक होटल में ठहरे थे, जहाँ उनके साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने मारपीट की। उन्होंने मंच पर कहा, "मैं डरता नहीं हूँ," और इसके बाद अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। जिस क्षण मासूम शर्मा अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, उस समय विधायक उमेश शर्मा भी वहाँ उपस्थित थे, लेकिन उनकी ओर से इसे रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
इस घटना के बाद शिक्षा के वातावरण को लेकर लोगों में प्रश्न उठने लगे हैं। क्या सार्वजनिक मंच पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह मतलब है कि महिलाओं का अपमान किया जाना सामान्य है? क्या हमें इस प्रकार की संस्कृति का सामना करना चाहिए?
छात्रों की सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों पर सवाल
दूसरी ओर, कॉलेज के छात्रों और दर्शकों ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई ने कहा कि यह एक शिक्षा संस्थान के लिए काफी शर्मनाक है कि ऐसे विवादास्पद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। क्या शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्राप्त करने के लिए होते हैं, या यह स्थान सांस्कृतिक मूल्यों को भी समृद्ध करने के लिए हैं?
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का बड़ा सवाल यह है कि क्या हमें इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता नहीं है? क्या वक्त आ गया है कि शिक्षा की संस्कृतियों को पुनर्स्थापित किया जाए? हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों को एक संरक्षित और उचित वातावरण मिले।
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Team India Twoday - अनुश्री
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