देहरादून में ऑपरेशन स्वास्थ्य पदयात्रा पर पुलिस की कार्रवाई, स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग पर उग्र हुआ आंदोलन

रैबार डेस्क:  चौखुटिया में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की तैनाती की मांग को लेकर... The post ऑपरेशन स्वास्थ्य पदयात्रा पहुंची देहरादून, गांधी पार्क जा रहे पदयात्रियों को पुलिस ने जबरन रोका, झड़प appeared first on Uttarakhand Raibar.

Nov 4, 2025 - 00:27
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देहरादून में ऑपरेशन स्वास्थ्य पदयात्रा पर पुलिस की कार्रवाई, स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग पर उग्र हुआ आंदोलन

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कम शब्दों में कहें तो, ऑपरेशन स्वास्थ्य पदयात्रा ने देहरादून में स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर जबरदस्त तूल पकड़ लिया है। चौखुटिया से शुरू हुई यह यात्रा अब राजधानी में पहुंच चुकी है, लेकिन पुलिस ने पदयात्रियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया।

रैबार डेस्क: 2 अक्टूबर को अल्मोड़ा के चौखुटिया से शुरू हुआ जन आंदोलन "ऑपरेशन स्वास्थ्य", देहरादून पहुंच गया है। यह पदयात्रा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सकों की तैनाती की मांग को लेकर चल रही है। जबकि प्रदेश सरकार 25 वर्षों की उपलब्धियों का जश्न मना रही है, यह पदयात्रा पिछले 25 वर्षों के विकास की असलियत को उजागर कर रही है। 24 अक्टूबर को चौखुटिया से प्रारंभ हुई इस पैदल यात्रा का जत्था सोमवार शाम को देहरादून में पहुंचा, लेकिन जोगीवाला चौक पर पुलिस ने यात्रियों को जबरन रोक दिया और कई लोगों को बस में ठूंसने का प्रयास किया।

पदयात्रियों और पुलिस के बीच हुई झड़प

जोगीवाला चौक पर भारी पुलिस बल तैनात था, जिसने पद यात्रियों को रोकने के लिए वास्तविक कार्रवाई की। जब यात्रियों ने गांधी पार्क जाने की मांग की, तो पुलिस ने उन्हें बलात रोका। इस घटना के दौरान, पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प भी हुई। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस समय खबर लिखे जाने तक, पदयात्री अपनी मांगों पर अड़े रहे और पुलिस के साथ उनकी टकराव की स्थिति बनी रही।

पदयात्रा का उद्देश्य और उसका महत्व

यह पदयात्रा केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू की गई है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य स्थिति और उनकी ज़रूरतों पर भी प्रकाश डालती है। आंदोलनकारी चौखुटिया से देहरादून के गांधी पार्क में रात्रि धरना देने का कार्यक्रम रखे हुए थे, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई थी।

आंदोलन का सामाजिक एवं राजनीतिक पहलू

इस आंदोलन का सामाजिक दृष्टिकोण यह है कि नागरिकों को उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं की बात करने का अवसर मिल रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण, स्थानीय लोग जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित रह रहे हैं। यह जन आंदोलन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नागरिकों की आवाज को शासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

लोगों की प्रतिक्रिया और सरकार की प्रतिक्रिया

पदयात्रियों के प्रति पुलिस की कार्रवाई ने जन समुदाय में चिंता और आक्रोश पैदा किया है। लोगों का मानना है कि सरकार को उनकी समस्याओं को सुनने और तत्परता से समाधान करने की जरूरत है। समाज के अन्य वर्गों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है, जिससे यह चौंकाने वाली स्थिति बन गई है।

अखिरकार, इस आंदोलन का संदेश स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता हर नागरिक का अधिकार है, और जब तक सरकार इसे नहीं समझेगी, तब तक लोगों की आवाजें उठती रहेंगी।

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साभार, टीम इंडिया टुडे - राधिका शर्मा

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