परिश्रम और संकल्प की कहानी: भोजनमाता का बेटा बना सब इंस्पेक्टर, मां के आंसू खुशी से छलके

रैबार डेस्क:  मिड डे मील बनाकर घर चलाने वाली पहाड़ की मां की खुशी का... The post संघर्षों में तपकर भोजनमाता का बेटा बना सब इंस्पेक्टर, बेटे की सफलता पर छलके मां के आंसू appeared first on Uttarakhand Raibar.

Oct 13, 2025 - 18:27
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परिश्रम और संकल्प की कहानी: भोजनमाता का बेटा बना सब इंस्पेक्टर, मां के आंसू खुशी से छलके
रैबार डेस्क:  मिड डे मील बनाकर घर चलाने वाली पहाड़ की मां की खुशी का... The post संघर्षों में तपकर भोजनमात

परिश्रम और संकल्प की कहानी: भोजनमाता का बेटा बना सब इंस्पेक्टर, मां के आंसू खुशी से छलके

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कम शब्दों में कहें तो, मेहनत और त्याग की अद्भुत कहानी ने एक बेटे को सफलता के नए आयाम तक पहुँचाया है, जहां उसकी मां, जो वर्षों से एक भोजनमाता के रूप में काम कर रही हैं, की आंखें आज खुशी के आंसुओं से भर गईं।

पिथौरागढ़ के धर्मेंद्र भट्ट ने हाल ही में उत्तराखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर अपनी जगह बनाई है। यह सफलता केवल एक नौकरी के चयन की बात नहीं है, बल्कि विफलताओं और संघर्षों के बीच से निकलकर अपने सपनों को साकार करने की कहानी है।

संघर्षों की कहानी

धर्मेंद्र की यात्रा को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने पांच वर्षों तक विभिन्न प्राइवेट कंपनियों, होटलों और दुकानों में काम किया। इन कठिनाइयों के बीच, उन्होंने अपनी पढ़ाई का सिलसिला नहीं छोड़ा। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है।

मां का योगदान और त्याग

धर्मेंद्र की मां पिछले 22 वर्षों से प्राथमिक विद्यालय मुवानी में भोजनमाता के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने हमेशा अपने बेटे को सच्चाई, ईमानदारी, और मेहनत के संस्कार दिए। जब धर्मेंद्र ने सब इंस्पेक्टर बनने की खबर साझा की, तो मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके आंसू इस बात के प्रतीक हैं कि यह केवल एक नौकरी का चयन नहीं, बल्कि एक मातृ स्नेह और त्याग की जीत है।

एक प्रेरणा स्रोत - ध्रुव कोचिंग क्लासेस

धर्मेंद्र ने अपनी तैयारी के दौरान 'ध्रुव कोचिंग क्लासेस' की स्थापना की, जहाँ उन्होंने गरीब परिवारों के छात्रों को न सिर्फ पढ़ाई का अवसर दिया, बल्कि उन्हें SSC GD और भारतीय सेना जैसी सेवाओं में चयनित होने का मार्ग भी प्रशस्त किया। अब तक 25 से अधिक छात्र इस कोचिंग में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। यह संस्थान उन बच्चों के लिए एक उम्मीद की किरण बन चुका है, जिन्हें सामान्य संसाधनों के बिना भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।

गुरु का योगदान

धर्मेंद्र अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां के अलावा, अपने गुरु प्रताप सिंह पुंडीर को भी देते हैं। वह कहते हैं, "अगर गुरु का मार्गदर्शन न मिला होता, तो शायद मैं कभी इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाता।" यह बताता है कि एक सही मार्गदर्शन और प्रेरणा कितनी महत्वपूर्ण होती है।

संकल्प और सफलता का संदेश

धर्मेंद्र की कहानी यह संदेश देती है कि कठिनाइयाँ आपके आत्मविश्वास को कम नहीं करती, बल्कि उसे और भी मजबूत बनाती हैं। हर व्यक्ति के जीवन में संघर्ष है, लेकिन जो लोग हार नहीं मानते, वही अंततः सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं।

इस कहानी ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके पास सपने हैं, और उन्हें साकार करने का संकल्प है, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।

इस प्रकार, इस प्रतिभाशाली युवक की कथा, न केवल उसके लिए, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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दिल से, नीता शर्मा, टीम इंडिया टुडे

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