पौड़ी: भरसार विश्वविद्यालय में हॉर्टीकल्चर छात्रा की मौत, छात्रों का प्रशासन पर गंभीर आरोप
रैबार डेस्क: पौड़ी जनपद के भरसार में स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय... The post पौड़ी: भरसार विश्वविद्यालय में हॉर्टीकल्चर छात्रा की मौत, आक्रोशित छात्र छात्राओं ने विवि प्रशासन पर लगाए गंभीर लापरवाही के आरोप appeared first on Uttarakhand Raibar.
पौड़ी में हॉर्टीकल्चर छात्रा की मौत से छिड़ा विवाद, छात्रों ने विवि प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
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कम शब्दों में कहें तो, पौड़ी जनपद के भरसार स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में एक हॉर्टीकल्चर छात्रा की असामयिक मृत्यु ने छात्रों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीमार छात्रा को सही समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई, जिसका नतीजा उनकी मौत के रूप में सामने आया।
पौड़ी जनपद के भरसार में स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में बीएससी हॉर्टीकल्चर की चौथे वर्ष की छात्रा, मधु यादव (23) की अचानक तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, मधु पंतनगर निवासी थीं और पिछले तीन-चार दिनों से बीमार थीं। उनके साथी छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग करके उनकी चिकित्सा कराने की कोशिश की, लेकिन कहा जा रहा है कि वहां उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली।
बीमारी के बावजूद लापरवाही
छात्रा की बुरी हालत के कारण पहले उन्हें पाबौ और फिर जिले के श्रीनगर अस्पताल में भर्ती किया गया। परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें एम्स, ऋषिकेश रेफर किया गया। लेकिन, बीते रविवार शाम को, जब वह ऋषिकेश ले जायी जा रही थीं, तब रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई।
छात्रों का प्रदर्शन
मधु की मौत की सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय के छात्रों में गहरा आक्रोश फैल गया। छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। छात्रों के मत के अनुसार, प्रशासन और एडीएसडब्ल्यू ने छात्रा की तबियत को गंभीरता से नहीं लिया और उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजने में देरी की। एंबुलेंस की कमी के कारण छात्रों को आधी रात अकेले छोड़ दिया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
चिकित्सा सुविधाओं की कमी
छात्राओं का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय परिसर में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं होतीं, तो संभवतः मधु की जान बचाई जा सकती थी। साथी छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि श्रीनगर में भी उनकी स्थिति नहीं सुधरी, जिसके कारण उन्हें फिर ऋषिकेश भेजा गया।
छात्राओं ने प्रशासन और जिम्मेदार व्यक्तियों पर त्वरित कार्यवाही न करने का आरोप लगाते हुए इसे छात्राओं की जान के साथ खेलना बताया। इस मामले को लेकर विवि प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया अभी प्राप्त नहीं हुई है।
आगे की कार्रवाई
छात्राओं ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को लेकर उचित कदम नहीं उठाता, तो वे और अधिक व्यापक रूप से प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगी। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की चिकित्सा सुविधा और छात्र कल्याण की व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाए हैं।
छात्राओं का कहना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए अक्सर संघर्ष करना पड़ता है। इतना ही नहीं, अब यह घटना पुलिस एवं मानवाधिकार संगठनों की भी दृष्टियों में आ सकती है।
उम्मीद है कि इस दुखद घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी चिकित्सा व्यवस्थाओं और छात्र कल्याण के मुद्दे पर पुनर्विचार करेगा। इसके साथ ही, यह भी आवश्यक है कि यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं की खराबी के प्रति जागरूकता लाए और विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को उनके मूल अधिकारों के प्रति सजग करे।
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Team India Twoday - लेखिका: सना शर्मा
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