बिहारियों को घरों की नेमप्लेट लगाने का ठेका: सीएम धामी ने टिहरी और उत्तरकाशी के आदेशों को किया रद्द
रैबार डेस्क: टिहरी और उत्तरकाशी में घरों पर स्लोगन लिखने और नेमप्लेट लगाने का काम... The post बिहार के लोगों को घरों की नेमप्लेट लगाने का ठेका, सीएम ने रद्द किया टिहरी, उत्तरकाशी के DPRO का आदेश appeared first on Uttarakhand Raibar.
बिहारियों को घरों की नेमप्लेट लगाने का ठेका: सीएम धामी ने टिहरी और उत्तरकाशी के आदेशों को किया रद्द
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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी और उत्तरकाशी में घरों की नेमप्लेट लगाने का ठेका बिहार के लोगों को दिए जाने के मामले में हलचल मची है। सीएम धामी ने इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया है।
हाल ही में टिहरी और उत्तरकाशी के जिला पंचायती राज अधिकारियों द्वारा घरों पर स्लोगन लिखने और नेमप्लेट लगाने का काम बिहार के निवासियों को देने का निर्णय किया गया था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। इस आदेश के अनुसार, बिहार निवासी उपेंद्र कुमार को उत्तरकाशी में और निपेंद्र कुमार को टिहरी में ठेका दिया गया था। उनके अनुसार, प्रति परिवार 40 रुपए लिए जाने थे। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की।
सीएम धामी की त्वरित कार्रवाई
सीएम धामी ने तुरंत टिहरी और उत्तरकाशी के डीपीआरओ द्वारा जारी आदेशों को रद्द किया और इस मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सभी सरकारी योजनाएँ और कार्यक्रम पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ चलें, जिसमें स्थानीय लोगों की रोजगार संबंधी आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखा जाए।
स्थानीय कल्याण और रोजगार का ध्यान रखना
मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 करोड़ रुपये तक के सरकारी अधिप्राप्तियों में स्थानीय निवासियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह स्पष्ट है कि सरकार द्वारा स्थानीय लोगों के रोजगार और हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों पर कार्रवाई
टिहरी के डीएम द्वारा भी इस मामले में जिला पंचायती राज अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। लक्ष्य स्पष्ट है: सभी स्तरों पर सरकारी नियमों का पालन किया जाए और सभी कार्यों में जनहित को सर्वोपरि रखा जाए।
इस मामले ने साफ तौर पर यह साबित किया है कि सरकार स्थानीय लोगों के हितों को पहली प्राथमिकता देने के लिए दृढ़ संकल्पित है। यह प्रकार की स्थिति न केवल उन आदेशों के प्रति जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सरकार अपने कार्य में पारदर्शिता बरतने के लिए तत्पर है।
इस बवाल के बाद, मुख्यमंत्री ने सरकार के संकल्प के अनुसार सभी योजनाओं को जनहित में लागू करने की बात दोहराई। लोक प्रतिनिधियों और सरकार के बीच संवाद की आवश्यकता भी इस स्थिति में सामने आई है ताकि भविष्य में इस तरह के निर्णय लेने में सावधानी बरती जा सके।
अंत में, हम यह उम्मीद करते हैं कि सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए अपनी भूमिका निभाएगी और ऐसे मामलों मेंें निष्पक्षता से कार्य करेगी। इसके साथ ही सभी नागरिकों को भी इस चर्चा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
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सादर,
Team India Twoday - नंदिनी शर्मा
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