‘रवांई : लोकसंस्कृति एवं पर्यटन’ का विमोचन - सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल दस्तावेज

बड़कोट। नगर पालिका परिषद बड़कोट में रविवार को शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत “ध्यानी” द्वारा लिखित पुस्तक ‘रवांई : लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ का भव्य लोकार्पण किया गया। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम …

May 11, 2026 - 00:27
 58  4874
‘रवांई : लोकसंस्कृति एवं पर्यटन’ का विमोचन - सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल दस्तावेज
बड़कोट। नगर पालिका परिषद बड़कोट में रविवार को शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत “ध्यानी” द्

‘रवांई : लोकसंस्कृति एवं पर्यटन’ का विमोचन - सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल दस्तावेज

कम शब्दों में कहें तो, बड़कोट नगर पालिका परिषद में रविवार को शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत "ध्यानी" की पुस्तक ‘रवांई : लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ का बेहद भव्य विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम में शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली।

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday

बड़कोट। नगर पालिका परिषद बड़कोट में हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत “ध्यानी” द्वारा लिखित पुस्तक ‘रवांई : लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ का भव्य विमोचन किया गया। इस आयोजन का समन्वयन राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा किया गया था और इसे सफल बनाने में अजीज प्रेम जी फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण दस्तावेज

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महावीर रवांल्टा, जो एक प्रसिद्ध साहित्यकार हैं, ने पुस्तक को रवांई क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि "यह केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।" उन्होंने यह भी बताया कि लोक संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं।

पुस्तक की समीक्षा

पुस्तक की समीक्षा करते हुए खजान चौहान ने कहा कि इसमें सभी महत्वपूर्ण विषयों को गंभीरता से शामिल किया गया है, जिन्हें सामने लाना समय की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने पुस्तक की सामग्री को शोधपरक और उपयोगी बताते हुए इसे रवांई क्षेत्र की संस्कृति, समाज और पर्यटन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कृति माना। रवांई : लोक संस्कृति एवं पर्यटन

युवाओं के लिए विशेष महत्व

कार्यक्रम में उपस्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. सुबोध बिष्ट ने पुस्तक को युवाओं और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। उनके अनुसार, "स्थानीय इतिहास और संस्कृति पर आधारित साहित्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।" उन्होंने लोकसंस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।

रचनात्मक पहल का महत्व

नगर पालिका अध्यक्ष विनोद डोभाल ने कहा कि इस तरह की रचनात्मक पहल समाज को नई दिशा देती हैं। उन्होंने पुस्तक को क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण और विस्तार में महत्वपूर्ण कदम बताया।

लेखन का सफर

पुस्तक के लेखक ध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’ ने अपने लेखन सफर के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पुस्तक तैयार करने के लिए उन्होंने रवांई घाटी का गहन भ्रमण किया। इस दरम्यान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद किया और अनेक संस्मरणों को पुस्तक में समाहित किया। उनका उद्देश्य रवांई की संस्कृति और पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाना है।

शिक्षा में सहयोग

कार्यक्रम के दौरान चर्चा हुई कि यह पुस्तक विद्यालयों में भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि छात्र-छात्राएं अपने क्षेत्र की संस्कृति और विरासत से परिचित हो सकें। लेखक ने पुस्तक को कम कीमत पर उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया।

प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक जीवन

पुस्तक में रवांई क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य और लोकजीवन का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें सरनौल, मोरी, पुरोला, नौगांव, बड़कोट, हनोल, हरकीदून, रूपिन घाटी, दयारा बुग्याल और यमुनोत्री धाम जैसे कई प्रमुख स्थल शामिल हैं। यह पुस्तक केवल पर्यटन स्थलों के बारे में नहीं बताती, बल्कि वहां के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी अच्छी तरह से प्रस्तुत करती है।

संवेदनशील विषयों का समावेश

पुस्तक में लोकपर्वों, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, आभूषण, पशुपालन, वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों को भी गहराई से कवर किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि ये पुस्तक हर व्यक्ति के लिए संग्रहणीय और प्रेरणादायी साबित होगी जो उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को समझना चाहता है।

प्रकाशक का समर्थन

कार्यक्रम के अंत में हिमांतर प्रकाशन के शशि मोहन रवांल्टा ने सभी उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया और बताया कि उनका उद्देश्य क्षेत्रीय रचनाकारों को एक मंच प्रदान करना है। उनका प्रकाशन संस्थान लंबे समय से उत्तराखंड की लोक संस्कृति और साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित है।

भविष्य की योजनाएं

उन्होंने भविष्य में भी उत्तराखंड की संस्कृति और साहित्य से जुड़ी महत्वपूर्ण कृतियों को प्रकाशित करने का भरोसा दिया। क्षेत्रीय लोकसाहित्य और लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने वाली पुस्तकों का प्रकाशन वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इस विशेष अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुपमा रावत, प्रहलाद रावत, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक रुकम सिंह रावत और कई अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जो स्थानीय साहित्य और संस्कृति के संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

आगामी समय में इस पुस्तक का प्रभाव किस प्रकार से व्यापक होगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा, लेकिन निश्चित रूप से यह रवांई क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और पौष्टिकता प्रदान करने में सहायक साबित होगी।

For more updates, visit India Twoday.

सादर, टीम इंडिया टुडे
सभी जानकारी साझा करने वाली भारतीय महिला पत्रकार

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow