राज्यपाल ने किया श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन, कहा – गुरुवाणी और देववाणी का सार्थक मिलन

देहरादून : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को लोक भवन में ‘आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी’ के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन किया। आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का संस्कृत में यह पहला सम्पूर्ण पद्यानुवाद है, जिसे रामतीर्थ केन्द्र और साहित्याचार्य श्री जयनारायण शास्त्री जी द्वारा अनुवादित किया गया है। यह […] The post राज्यपाल ने किया श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन, कहा – गुरुवाणी और देववाणी संस्कृत का दिव्य संगम first appeared on Vision 2020 News.

Jul 11, 2026 - 18:27
 65  5119
राज्यपाल ने किया श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन, कहा – गुरुवाणी और देववाणी का सार्थक मिलन
देहरादून : राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को लोक भवन में ‘आदि श्री गुरु ग्

राज्यपाल ने किया श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन

देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को लोक भवन में ‘आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी’ के संस्कृत पद्यानुवाद का विमोचन किया। यह संस्कृत में पहला सम्पूर्ण पद्यानुवाद है, जिसे रामतीर्थ केन्द्र और साहित्याचार्य श्री जयनारायण शास्त्री जी द्वारा अनुवादित किया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन रामतीर्थ केन्द्र (सहारनपुर) की स्वर्ण जयंती के अवसर पर किया गया था।

कम शब्दों में कहें तो, यह विमोचन केवल एक कृति का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक समरस्ता का एक ऐतिहासिक पर्व है। राज्यपाल ने कहा कि इस आयोजन का महत्व संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के संवर्धन में भी है।

गुरुवाणी और देववाणी का दिव्य संगम

विमोचन कार्यक्रम में अपने उद्बोधन देते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह केवल एक संस्थान की स्वर्ण जयंती का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्ञान-परम्परा का ऐतिहासिक उत्सव है। उन्होंने बताया कि 'गुरुवाणी और देववाणी संस्कृत' का यह दिव्य संगम भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के गहरे अर्थों को समझकर उन्हें जीवन में उतारना और इसके ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

आध्यात्मिक संवाद और सामाजिक समरसता का प्रतीक

राज्यपाल ने कहा कि ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब’ का संस्कृत पद्यानुवाद भारतीय ज्ञान-परम्परा, साहित्य और अध्यात्म के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल शब्दों का अनुवाद नहीं है, बल्कि गुरुवाणी की दिव्य चेतना और संस्कृत की शाश्वत ज्ञानधारा का एक अद्भुत समन्वय है। यह कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, अध्ययन और शोध का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

विद्वानों की तपस्या की सराहना

राज्यपाल ने साहित्याचार्य जयनारायण शास्त्री 'यात्री' जी की दशकों की तपस्या और विद्वत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अद्वितीय कृति केवल उनके प्रयास से संभव हो पाई है। साथ ही, आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर, आचार्य गंगेश्वर नाथ प्रभाकर, डॉ. आभा प्रभाकर और सम्पूर्ण सम्पादकीय मंडल के समर्पण की भी सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेजीकरण और प्रकाशन केवल अभिलेखन का कार्य नहीं है, बल्कि सभ्यता की सामूहिक स्मृति के संरक्षण का कार्य है।

राज्यपाल ने रामतीर्थ केन्द्र परिवार और इस ऐतिहासिक कृति के निर्माण से जुड़े सभी विद्वानों व सहयोगियों को दिल से बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस विमोचन से न केवल धार्मिक आस्थाओं को बल मिलेगा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में भी एक नया आयाम जोड़ने का कार्य करेगा। ऐसे कार्यों से हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और भावी पीढ़ियों के लिए उसका संरक्षण करना आवश्यक है।

इस प्रकार के आयोजनों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय शास्त्र और संस्कृति को आधुनिक संदर्भ में एक नई दिशा दी जा रही है। इसके माध्यम से हम अपने युवाओं को अपने इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास कर रहे हैं।

इसके अलावा, इस कार्यक्रम के माध्यम से हमने यह सुनिश्चित किया है कि अगली पीढ़ी अपने ग्रंथों के गहरे अर्थों को समझे और उन्हें अपने जीवन में उतारे। इसके जरिए हम अपनी ज्ञान परंपरा को और भी मजबूती के साथ प्रतिष्ठित कर सकते हैं।

अधिक जानकारी और नवीनतम समाचारों के लिए कृपया देखें India Twoday.

सादर,
टीम इंडिया टुडे, प्रियंका अग्रवाल

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow