वन अधिकारी: प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षक - मुख्यमंत्री धामी

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.)  गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक  राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक […]

Aug 20, 2026 - 09:27
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वन अधिकारी: प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षक - मुख्यमंत्री धामी
देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों

वन अधिकारी: प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षक - मुख्यमंत्री धामी

कम शब्दों में कहें तो, वन अधिकारी केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हमारी प्राकृतिक धरोहर के प्रहरी हैं। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ हुए संवाद कार्यक्रम में कही।

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में, भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन तथा उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया और कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

उपराष्ट्रपति का स्वागत

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति जी के व्यक्तित्व से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।

वन अधिकारियों की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई देते हुए उनका ध्यान इस दिशा पर केन्द्रित किया कि वन सेवा का कार्य केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि देश की प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, इसलिए इसका संरक्षण महत्वपूर्ण है।

जलवायु परिवर्तन का चुनौती

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इस दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया कि वे आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के हितों को भी ध्यान में रखें।

पर्यावरण और विकास का संतुलन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के रास्ते पर बढ़ रहा है जहां विकास के साथ पर्यावरण का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। इस दिशा में 'मिशन LiFE' और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे अभियानों के लाभों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।

वन भूमि का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में अतिक्रमण विरोधी अभियानों की जानकारी देते हुए कहा कि लगभग 13,000 एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। कई नई पहलों जैसे 'फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स' का गठन भी किया गया है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपाय

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्षों को कम करने के लिए नए उपाय जैसे बायोफेंसिंग और वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 को मजबूत किया गया है। ये सभी पहलें ज़रूरी हैं ताकि प्रकृति तथा स्थानीय समुदायों के बीच अच्छा संतुलन बना रहे।

भविष्य के लिए उम्मीदें

मुख्यमंत्री ने सभी परिवीक्षार्थियों को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने का दायित्व है। केवल प्रशासनिक अधिकारियों की तरह नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी के रूप में

कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की समृद्धि को सुनिश्चित करना है।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे
– प्रियंका वर्मा

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