SCERT और DIET का एकल शैक्षिक ढांचा: LT शिक्षकों को TET से मुक्त करने की विनय थपलियाल की मांग

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और अकादमिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एससीईआरटी के अध्यक्ष विनय थपलियाल ने SCERT और DIET के लिए एकीकृत एवं विशेषज्ञता आधारित अकादमिक ढांचा विकसित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने रविदर्शन तोपाल के साथ कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी को मुख्यमंत्री …

Oct 5, 2026 - 00:27
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SCERT और DIET का एकल शैक्षिक ढांचा: LT शिक्षकों को TET से मुक्त करने की विनय थपलियाल की मांग
देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और अकादमिक रूप से मजबूत बनाने के

SCERT और DIET का एकल शैक्षिक ढांचा: LT शिक्षकों को TET से मुक्त करने की विनय थपलियाल की मांग

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदमों का योगदान करते हुए, एससीईआरटी के अध्यक्ष विनय थपलियाल ने SCERT और DIET के लिए एकीकृत तथा विशेषज्ञता पर आधारित अकादमिक ढांचा बनाए जाने की मांग की है।

देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षक शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और अकादमिक रूप से मजबूत बनाने हेतु एससीईआरटी के अध्यक्ष विनय थपलियाल ने SCERT और DIET के लिए एकीकृत एवं विशेषज्ञता आधारित ढांचा विकसित करने की अपील की है। उन्होंने इस संदर्भ में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा, जिसमें एक व्यापक शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता की बात कही गई।

शिक्षा का एकसमान ढांचा: NEP 2020 का समर्थन

विनय थपलियाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार, राज्य में शिक्षक शिक्षा के लिए एक सुसंगत Single Teacher Education Academic Structure का निर्माण करना ज़रूरी है। उनका तर्क है कि जब SCERT और DIET एक ही व्यापक शिक्षाशास्त्र का हिस्सा हैं, तो दोनों के लिए अलग ढांचे और कैडर की आवश्यकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।

अलगाव से अकादमिक समन्वय में बाधा

थपलियाल ने चेतावनी दी है कि SCERT और DIET को अलग-अलग कैडर में बांटने से भविष्य में शैक्षिक और संवैधानिक विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं और इससे भी ज्यादा, इन दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक समन्वय बाधित हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षक शिक्षा, प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या निर्माण, मूल्यांकन, शोध और शैक्षिक नवाचार जैसे कार्यों के लिए विशिष्ट अकादमिक विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

SCF-TE के तहत ढांचा निर्धारण की मांग

उन्होंने यह भी कहा कि State Curriculum Framework for Teacher Education (SCF-TE) के लागू होने के बाद ही SCERT-DIET के संगठनात्मक और कैडर ढांचे का अंतिम निर्धारण किया जाना चाहिए। वह चाहते हैं कि प्रशासनिक ढांचे को जल्दबाजी में तैयार करने के बजाय, पहले शिक्षक शिक्षा, प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम, रिसर्च और डिजिटल शिक्षा की भूमिकाओं को स्पष्ट किया जाए।

शिक्षक शिक्षा प्रणाली में विशेषज्ञता की आवश्यकता

थपलियाल ने भविष्य की शिक्षा प्रणाली में Dedicated Teacher Education Cadre की अवधारणा को महत्व दिया है। उनके अनुसार, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षाशास्त्र से जुड़े विशेषज्ञों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप काम देने से अकादमिक प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

तबादलों का असर

उन्होंने SCERT में लगातार तबादलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। उनका कहना था कि राज्य स्तरीय अकादमिक संस्थान में बार-बार अधिकारियों और विशेषज्ञों का स्थानांतरण संस्थागत निरंतरता पर बुरा असर डाल सकता है। ऐसा होने से शैक्षिक योजनाओं और शोध कार्यों को नुकसान हो सकता है।

TET में छूट की आवश्यकता

थपलियाल ने एलटी ग्रेड शिक्षकों के लिए TET संबंधी कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता जताई है। उनका मानना है कि शिक्षक पात्रता से संबंधित न्यायिक आदेशों की व्याख्या ऐसी होनी चाहिए, जिससे एलटी शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित न हो।

DIET में विशेषज्ञता आधारित बदलाव की आवश्यकता

थपलियाल ने DIET को केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने वाले संस्थान के रूप में सीमित रखने के बजाय उसे शैक्षिक समस्याओं के समाधान और विद्यालयों को अकादमिक सहयोग देने वाले संस्थान में विकसित करने की आवश्यकता बताई है।

मुख्यमंत्री से वार्ता का आश्वासन

कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। आशा है कि सरकार SCERT-DIET के एकल ढांचे, SCF-TE आधारित शिक्षक शिक्षा व्यवस्था, SCERT में अकादमिक निरंतरता और LT शिक्षकों के TET संबंधी मामलों पर निर्णय लेगी।

निष्कर्ष

विनय थपलियाल ने सरकार से SCERT-DIET के लिए एक एकीकृत अकादमिक ढांचा विकसित करने, SCF-TE खत्म होने के बाद अंतिम कैडर संरचना तय करने, और SCERT में निरंतर तबादलों को रोकने की मांग की है। उनका मानना है कि उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए केवल प्रशासनिक पुनर्गठन ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अकादमिक विशेषज्ञता, संस्थागत निरंतरता और स्पष्ट कैडर व्यवस्था की आवश्यकता है, जिससे शिक्षण, शोध, नवाचार तथा दिशानिर्देश की व्यवस्था को मजबूती मिल सके।

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सादर,
टीम इंडिया टुडे - अंजलि रावत

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