आजमगढ़ की घटना को लेकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत:पूर्व IPS अभिताभ ठाकुर बोले दोषी पुलिस कर्मियों पर मुकदमा न लिखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण
आजमगढ़ में दलित युवक की थाने में मौत के बाद के मामले में सियासत तेज हो गई है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अमिताथ ठाकुर ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की है। एक दिन पूर्व भी अमिताभ ठाकुर ने इस पूरे मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र के माध्यम से दोषी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को एक करोड़ रूपए का मुआवजा दिए जाने की बात कही थी। दोषी पुलिसकर्मियों पर हो मुकदमा मानवाधिकार आयोग में की गई शिकायत के मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा कि अब तक इस मामले में जो तथ्य आए हैं, उनसे स्पष्ट रूप से पुलिस हिरासत में मौत का मामला बनता है। यहां तक की स्वयं एसएसपी आजमगढ़ हेमराज मीणा ने भी इस मामले में पुलिस कर्मियों को दोषी मानते हुई कुछ कर्मियों को निलंबित किया है। इसके बाद भी इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना घोर आपत्तिजनक है और पुलिस कर्मियों का सीधा-सीधा बचाव किया जाना है। ऐसे में मानवाधिकार आयोग से तत्काल इस मामले में मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना सीआईडी से करवाने के आदेश की मांग की है।

आजमगढ़ की घटना को लेकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत
आजमगढ़ में हाल ही में हुई एक विवादास्पद घटना ने मानवाधिकार आयोग तक अपनी पहुँच बनाई है। पूर्व IPS अधिकारी अभिताभ ठाकुर ने इस मुद्दे पर अपनी टिप्पणी दी है, जिसमें उन्होंने दोषी पुलिस कर्मियों पर मुकदमा न लिखे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। यह विषय न केवल कानून व्यवस्था में विश्वास को चुनौती देता है, बल्कि समाज में सुरक्षा और अधिकारों के हनन के संदर्भ में भी चिंताजनक है।
पूर्व IPS अभिताभ ठाकुर की टिप्पणी
अभिताभ ठाकुर ने दावा किया कि यदि पुलिस के किसी भी सदस्य को उनके कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता है, तो यह न केवल न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि समाज में नागरिकों के प्रति पुलिस के व्यवहार को भी दर्शाएगा। उनका मानना है कि कानून के समक्ष सभी को समान होना चाहिए, और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
मानवाधिकार आयोग की भूमिका
मानवाधिकार आयोग ने आजमगढ़ की घटना को गंभीरता से लेते हुए इस मामले की जांच हेतु कदम उठाए हैं। आयोग का मुख्य कार्य मानवाधिकारों की रक्षा करना और सुनिश्चित करना है कि नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो। हालांकि, आयोग के निर्णय और कार्रवाई की गति को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।
समाज में सुरक्षा और न्याय का महत्व
जब कानून व्यवस्था में खामियां आती हैं, तो इससे लोगों का पुलिस पर विश्वास कम होता है। ऐसे मामलों में यदि उचित कदम नहीं उठाए जाते, तो इससे अपराधियों के हौंसले बढ़ते हैं और नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है। इसलिए, उचित जांच और कार्रवाई आवश्यक है।
अभिताभ ठाकुर का यह बयान एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करता है और समाज में एक आवश्यक संवाद को शुरू करने का अवसर प्रदान करता है। इसे गंभीरता से लेना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो सके।
अंत में, हमें सभी पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने और समाज में मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। यह एक सतत प्रक्रिया है जो हम सभी की जिम्मेदारी है।
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