उत्तरकाशी में मकर संक्रांति पर माघ मेले की धूम, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा

उत्तरकाशी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जनपद उत्तरकाशी में सुप्रसिद्ध माघ मेला (बाड़ाहाट कू थौलू) का शुभारंभ बुधवार को पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। रामलीला मैदान में आयोजित इस पौराणिक मेले का औपचारिक उद्घाटन बाड़ाहाट पट्टी के आराध्य कंडार देवता एवं बाड़ागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज की डोली के सानिध्य में मुख्यमंत्री …

Jan 15, 2026 - 09:27
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उत्तरकाशी में मकर संक्रांति पर माघ मेले की धूम, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा
उत्तरकाशी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जनपद उत्तरकाशी में सुप्रसिद्ध माघ मेला (बाड़ाहाट कू थौ

उत्तरकाशी में मकर संक्रांति पर माघ मेले की धूम, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तरकाशी में मकर संक्रांति के महापर्व पर माघ मेले का शुभारंभ अद्भुत श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

उत्तरकाशी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जनपद उत्तरकाशी में प्रसिद्ध माघ मेला (बाड़ाहाट कू थौलू) का शुभारंभ बुधवार को पारंपरिक धूमधाम के साथ हुआ। रामलीला मैदान में आयोजित इस पौराणिक मेले का औपचारिक उद्घाटन बाड़ाहाट पट्टी के आराध्य कंडार देवता एवं बाड़ागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज की डोली के सानिध्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। इसे उत्तरकाशी की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण माना जाता है।

सप्ताह भर चलने वाला यह मेला, जिसे बाड़ाहाट का थौलू भी कहा जाता है, स्थानीय लोगों की आस्था का प्रतीक है। इस मेले में भाग लेने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्तजन अपने लोक देवताओं की डोलियों और धार्मिक प्रतीकों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे। आपसी भाईचारे का एहसास कराते हुए सभी ने एक साथ मिलकर मेले का आनंद लिया।

पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

भागीरथी नदी में स्नान के उपरांत, कंडार देवता और हरि महाराज सहित अन्य देव डोलियों के साथ ग्रामीणों ने बाड़ाहाट क्षेत्र स्थित चमाला की चौंरी में डोली नृत्य और रासो-तांदी नृत्य का अद्भुत प्रदर्शन किया। मेले के पंडाल में घण्डियाल देवता, खंडद्वारी देवी, राज-राजेश्वरी देवी, त्रिपुर सुंदरी, नाग देवता और दक्ष काली जैसे अनेक देव डोलियों की उपस्थिति ने इस धार्मिक उत्सव को और ज्यादा भव्यता प्रदान की। उद्घाटन समारोह के दौरान ऋषिराम शिक्षण संस्थान की छात्राओं ने स्वागत गान और नृत्य की विशेष प्रस्तुतियाँ दीं।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मकर संक्रांति और माघ मेले की शुभकामनाएं देते हुए कहा, "बाबा विश्वनाथ की नगरी और मां भागीरथी की पावन धरा पर आयोजित यह मेले लोक आस्था का महाकुंभ है।" उन्होंने आगे कहा कि मकर संक्रांति से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, जिससे उत्तरकाशी की आध्यात्मिक पहचान भी बेहतर होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तरकाशी में अब विकास कार्यों की गति तेज है। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ये जनमानस तक पहुँच रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ विकास कार्यों को भी तेजी दी जा रही है।

विकास कार्य और रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरकाशी जनपद में ₹1000 करोड़ से अधिक की लागत से सड़कों का निर्माण और सुधार कार्य जारी है। साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाएँ जैसे 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट, पुरोला में उपजिला अस्पताल, यमुनोत्री में हेलीपैड निर्माण, सिंचाई योजनाएँ और भटवाड़ी में बाढ़ सुरक्षा कार्य भी प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि सिल्क्यारा टनल के पूर्ण होने पर यमुनोत्री और गंगोत्री के बीच की दूरी लगभग 25 किलोमीटर कम हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने "13 डिस्ट्रिक्ट–13 डेस्टिनेशन" और "वाइब्रेंट विलेज" कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटकों को नए आयाम देने की बात की, जिससे स्थानीय संस्कृति और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

कानून-व्यवस्था और सुशासन

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और सुशासन के महत्व को भी रेखांकित करते हुए कहा कि देवभूमि की मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य में सख्त भू-कानून और समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखंड ने एक नई मिसाल कायम की है। साथ ही 27,000 से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने अपने भ्रमण के दौरान विश्वनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर संतों के आशीर्वचनों व आध्यात्मिक संदेशों पर आधारित संकलन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

इस मेले ने न केवल जनपद उत्तरकाशी की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का कार्य किया, बल्कि पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए एक नया आकर्षण उत्पन्न किया है। यह मेला वास्तव में उत्तराखंड की संस्कृति का जीवंत उदाहरण है।

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सादर, टीम इंडिया टुडे - सृष्टि शर्मा

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