उत्तराखंड का हरेला पर्व: सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश ही नहीं देता, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, […]

Jul 17, 2026 - 00:27
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उत्तराखंड का हरेला पर्व: सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर

उत्तराखंड का हरेला पर्व: सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का जनआंदोलन बताया।

देहरादून, 28 जुलाई: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव का हिस्सा बने। इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सिर्फ हरियाली फैलाने का संदेश नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतिनिधित्व करता है।

सामाजिक समरसता का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला पर्व उत्तराखंड की एकता का प्रतीक है, जो सभी वर्गों को एकत्रित करता है। उन्होंने खुशी जताई कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी इस पर्व में उत्साह से भाग ले रहा है। यह उत्तराखंड की संस्कृति और विविधता में एकता की भावना का सबसे मजबूत उदाहरण है।

परंपरा और लोक संस्कृति का जश्न

राज्य की लोक कलाओं को नई पहचान दिलाने के लिए लोक संवर्धन पर्व महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की सराहना करते हुए कहा कि उनके गीतों ने उत्तराखंड की संस्कृति, महिलाओं के संघर्ष और सामाजिक मुद्दों को व्यापक स्तर पर फैलाने का काम किया है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प है। हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन के महत्व को पहले से ही समझा था। आज के जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों के समय, हरेला पर्व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।

राज्य सरकार का पौधारोपण कार्यक्रम

प्रदेश सरकार ने इस साल हरेला पर्व पर 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक पौधा आने वाले पीढ़ियों के लिए सुरक्षा का प्रतीक होगा। उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री का अभियान: "एक पेड़ माँ के नाम"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान का उल्लेख करते हुए, मुख्यमंत्री ने लोगों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाना चाहिए और उसे वृक्ष बनने तक देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।

स्थानीय उत्पादों का महत्व

मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक संवर्धन पर्व स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है। स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को बचाने और परिवारों की आजीविका को मजबूत करने का भी माध्यम है।

सांस्कृतिक धरोहर का प्रचार

उन्होंने सभी नागरिकों से हरेला पर्व का जश्न मनाने और लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर कई मंत्री, जन प्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे और पर्व की महत्ता को समझा।

इस प्रकार, हरेला पर्व केवल एक स्थानीय उत्सव नहीं है, बल्कि यह समुदाय के लिए एक सशक्त आंदोलन है जो प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। For more updates, visit India Twoday.

सादर, टीम इंडिया टुडे - राधिका सिंह