उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के दूसरे दिन की स्थिति, स्टाइपेंड बढ़ाने की बनी प्राथमिकता
रैबार डेस्क: उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे करीब 600 MBBS इंटर्न डॉक्टरों... The post सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, स्टाइपेंड बढ़ाने की कर रहे मांग appeared first on Uttarakhand Raibar.
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के दूसरे दिन की स्थिति
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 600 MBBS इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का आज दूसरा दिन है। इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, जो कि मौजूदा ₹17,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की है।
इंटर्न डॉक्टरों की मांग को लेकर सोमवार से शुरू हुई कार्य बहिष्कार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डालने की आशंका पैदा कर दी है। इंटर्न डॉक्टरों ने इस मुद्दे पर अस्पतालों में प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं।
इंटर्न डॉक्टरों की स्थिति
MBBS इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, ओपीडी, वार्ड और अन्य चिकित्सा कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है। उनका साफ कहना है कि वर्तमान ₹17,000 मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 करने की आवश्यकता है।
इंटर्न डॉक्टरों का यह भी कहना है कि कई बार उन्होंने इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों और सरकार के समक्ष रखा है, लेकिन उन्हें अब तक कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला है। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने कार्य बहिष्कार का फैसला लिया।
अस्पतालों पर पड़ने वाला असर
करीब 600 MBBS इंटर्न डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों की व्यवस्थाओं में दबाव बढ़ने की आशंका है। दून अस्पताल और हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का कुछ असर दिख रहा है, हालांकि व्यवस्थाएं अभी नियंत्रण में हैं।
हल्द्वानी में आंदोलन की जनकारी
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के इंटर्न डॉक्टरों ने भी इसी मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन करते हुए वर्तमान ₹17,000 मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 करने की अपील की है।
उन्होंने कहा है कि हालात के मद्देनजर और अन्य राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड के मुकाबले उनकी राशि अपर्याप्त है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने शासन और संबंधित अधिकारियों के सामने कई बार अपनी बात रखी है, लेकिन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
हड़ताल के दौरान इंटर्न डॉक्टर ओपीडी, आईपीडी, वार्ड और विभागीय नियमित इंटर्नशिप ड्यूटी से दूर हैं। हालांकि, वे मरीजों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है।
आगे की स्थिति और इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर होने वाले संभावित निर्णय को लेकर सबकी नजर बनी हुई है। उनकी मांगे और आंदोलन को ध्यान में रखते हुए सरकार को भी जल्द कोई जवाब देना होगा।
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सादर, टीम इंडिया टुडे – साक्षी शर्मा
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