उत्तराखंड में गहरी दरारें: बेतालघाट क्षेत्र में मंडरा रहा है बड़ा खतरा
बेतालघाट : बेतालघाट ब्लॉक के बसगांव क्षेत्र में कोसी नदी के किनारे भयावह स्थिति पैदा हो गई है। आवासीय भवनों के ठीक नीचे 200 मीटर दायरे में 1 मीटर गहरी दरारें और धंसाव देखे जाने से दर्जनभर परिवारों के घरों पर संकट मंडरा रहा है। श्री कैंची धाम तहसील प्रशासन ने शनिवार को स्थलीय निरीक्षण कर …
उत्तराखंड में गहरी दरारें: बेतालघाट क्षेत्र में मंडरा रहा है बड़ा खतरा
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के बेतालघाट ब्लॉक में कोसी नदी के किनारे स्थित बसगांव क्षेत्र में अद्भुत और भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहां के आवासीय भवनों के नीचे 200 मीटर के दायरे में 1 मीटर गहरी दरारें देखी गई हैं, जिससे दर्जनभर परिवारों के घरों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने हाल ही में स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति की गंभीरता की पुष्टि की है।
गांव के निवासियों में दहशत फैल गई है, क्योंकि उन्हें बारिश की आशंका के कारण रातों की नींद भी उड़ गई है। यह स्थिति केवल एक प्राकृतिक आपदा की शुरूआत नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं।
दरारों का भयानक नजारा
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि बीते शुक्रवार को दरारों की गहराई देखकर सभी के होश उड़ गए। घरों के नीचे फैली लंबी और चौड़ी दरारें जो लगातार गहरी हो रही हैं, ने सभी को चिंता में डाल दिया है। इसके अलावा, कोसी नदी की ओर से भी नई दरारें उभर रही हैं, जिससे पूरे गांव में धंसाव की आशंका उत्पन्न हो गई है। यहाँ तक कि किसानों ने आरोप लगाया है कि घरों के ऊपरी हिस्सों में बने पेयजल टैंकों से होने वाला रिसाव भी धंसाव का कारण बन रहा है।
प्रशासन ने किया स्थिति का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम मोनिका ने तुरंत राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद शकील को अपनी टीम के साथ गांव भेजा। उनकी मौजूदगी में ग्रामीणों ने खतरे की पूरी जानकारी दी, और स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह साफ हुआ कि 10 से अधिक मकान खतरे की जद में हैं। एक घर की सुरक्षा दीवार में पहुंची दरार ने चिंता को और बढ़ा दिया। अन्य स्थानों पर भी गहरी दरारों का पालन किया गया।
ग्रामीणों का आक्रोश और आशंका
स्थानीय निवासी अनूप सिंह नेगी ने कहा, “यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो घरों पर खतरा कई गुना बढ़ सकता है। अब आरंभिक राहत की आवश्यकता है।” अन्य ग्रामीण जैसे मोहन सिंह, दीवान सिंह, पूरन सिंह, प्रताप सिंह और लक्ष्मी दत्त नैनवाल ने भी तत्काल राहत की मांग की। हालात और बिगड़ने की आशंका से सभी को चिंता हो रही है।
परिवारों के विस्थापन की तैयारी
इस संकट को भांपते हुए, राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद शकील ने स्पष्ट किया है, “दरारों से खतरा स्पष्ट है और रिपोर्ट उपजिलाधिकारी को भेजी जा रही है।” प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भी इस मामले में सूचित कर दिया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों की टीम तुरंत भेजी जाए, ताकि क्षतिग्रस्त घरों का आकलन कर मुआवजा दिया जा सके। यह स्थिति पूरे कोसी नदी क्षेत्र में भू-कटाव की समस्या को गंभीर रूप से बढ़ा रही है।
यह घटनाएँ केवल एक भौगोलिक संकट नहीं हैं, बल्कि इससे सामाजिक प्रबंधन और संसाधनों की भी चुनौती बढ़ रही है। प्रशासन को चाहिए कि वे न केवल तात्कालिक राहत पर ध्यान दें, बल्कि दीर्घकालिक हल भी निकाले जिससे ऐसी समस्याओं का दोबारा सामना न करना पड़े।
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सादर, टीम इंडिया टुडे - प्रिया वर्मा
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