उत्तराखंड में नहर के पानी ने मचाई तबाही: छात्र की दर्दनाक मौत और परिवार का सहारा छिना

उत्तराखंड में बेमौसम आई आपदा ने कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले को गहरे शोक में डूबो दिया है। अस्कोट तहसील के ओझापाली गांव में हुए हादसे ने एक परिवार का…

Nov 28, 2025 - 18:27
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उत्तराखंड में नहर के पानी ने मचाई तबाही: छात्र की दर्दनाक मौत और परिवार का सहारा छिना
उत्तराखंड में बेमौसम आई आपदा ने कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले को गहरे शोक में डूबो दिया है। अस्को

उत्तराखंड में नहर के पानी ने मचाई तबाही

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आई बेमौसमी आपदा ने एक परिवार को गहरे दु:ख में डाल दिया है। अस्कोट तहसील के ओझापाली गांव में सिंचाई नहर के टूटने के إثر एक दो मंजिला घर ढह गया, जिससे एक छात्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

बेमौसमी आपदा का प्रभाव

इस प्राकृतिक आपदा ने कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है। विशेष रूप से ओझापाली गांव में जो घटना हुई है, वह बहुत ही शोकपूर्ण है। यहां रहने वाले ललित मोहन जोशी के घर का एक हिस्सा बुरी तरह से ढह गया, जिससे उनके बेटे भुवन जोशी की मृत्यु हो गई। भुवन, जो कि नारायणनगर पीजी कॉलेज में अपने उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रहा था, उस दिन अपने घर पर मौजूद था।

घटनास्थल का विवरण

जानकारी के अनुसार, नहर का पानी तेजी से बढ़ा और यह गांव से लगभग 60 मीटर ऊँचाई पर स्थित घर तक पहुँच गया। यह घटना यह स्पष्ट करती है कि प्राकृतिक आपदाएं कितनी घातक हो सकती हैं और इनका प्रभाव स्थानीय लोगों के जीवन पर कितना गहरा पड़ता है। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

समुदाय के लिए मदद की संभवानाएं

स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने तात्कालिक राहत सहायता के रूप में प्रभावित परिवार के लिए कुछ मदद का ऐलान किया है। हालाँकि, इस घटना ने न सिर्फ मृतक परिवार को बल्कि पूरे गांव को अशांत कर दिया है। आस-पास के लोग इस कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनने की कोशिश कर रहे हैं।

भविष्य के लिए सजगता

यह घटना हमें एक बार फिर यह सिखाती है कि जलवायु परिवर्तन और बेमौसमी बारिश के कारण आने वाली आपदाओं से हमें सजग रहना आवश्यक है। समाज के हर वर्ग को चाहिए कि वह इस प्रकार की घटनाओं के प्रति सचेत रहे और खुद को सभी प्रकार की आपदाओं के लिए तैयार रखे।

इस दर्दनाक घटना से यह भी साफ होता है कि प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे जल निकासी व्यवस्था को सही संरचना में लगाएं ताकि भविष्य में और कोई इस प्रकार की हानि ना हो।

उत्तराखंड में हुई इस घटना के बाद हम सबको एकजुट होकर इसकी गंभीरता को समझने की आवश्यकता है। इसके अलावा, इस प्रकार के हादसों से बचने के लिए स्थानीय लोगों को भी जागरूक करना महत्वपूर्ण है।

अंततः, यह घटना हमें मानवीय संवेदनाओं की कद्र करने की भी याद दिलाती है। हमें अपने आस-पास के लोगों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए और जब भी कोई आपदा आए तो एकजुट होकर उसके खिलाफ खड़े होना चाहिए।

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सच्ची संवेदनाओं के साथ,

टीम इंडिया टुडे, सुमित्रा वर्मा

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