उत्तराखंड में भाजपा विधायक के पत्र ने मचाई हलचल, गणेश गोदियाल ने SIT जांच की मांग की
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय से जुड़ा एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर सवाल …
उत्तराखंड में भाजपा विधायक के पत्र ने मचाई हलचल, गणेश गोदियाल ने SIT जांच की मांग की
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय के वायरल पत्र ने राजनीतिक संकट उत्पन्न कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मामले की SIT जांच की मांग की है, इसे गंभीर घटना मानते हुए।
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मचे इस तूफान की शुरुआत उस समय हुई जब भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय से जुड़ा एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पत्र के माध्यम से विधायक ने कुछ गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए प्रेस वार्ता आयोजित की।
गणेश गोदियाल का आक्रोश
गोदियाल ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति को देखते हुए, उन्होंने राज्यपाल से मिलने के लिए दो बार समय मांगा, लेकिन अनुमति नहीं मिली। उनका लक्ष्य था कि वे राज्यपाल के सामने सत्ता के दुरुपयोग तथा सरकार के भीतर बैठे कुछ लोगों के कथित कारनामों को उजागर करना चाहते थे। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड की राजनीति में क्या चल रहा है।
देहरादून बार प्रकरण की आलोचना
प्रेस वार्ता के दौरान गोदियाल ने हाल ही में देहरादून के एक बार से जुड़े प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद पुलिस विभाग की कई वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे एसपी, एसएसपी और आईजी, की भूमिका पर प्रशन खड़े होने लगे हैं। यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो आम जनता अपने शिकायतें किससे करें? यह एक गंभीर प्रश्न है।
वायरल पत्र के आरोप
गोदियाल ने भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय से जुड़े वायरल पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कुछ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि पत्र की सत्यता की पुष्टि आवश्यक है, लेकिन यदि इसमें दिए गए तथ्य सही हैं, तो इस विषय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पत्र में यह दावा किया गया है कि विधायक पिछले चार वर्षों से मुख्यमंत्री के द्वारा उपेक्षा और षड्यंत्र का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, आरोप लगाया गया है कि 8 जनवरी को एसएसपी के माध्यम से उनके बेटे को धमकाने का प्रयास किया गया और सामाजिक जीवन खत्म करने की धमकी दी गई।
सरकार और पुलिस की भूमिका
गोदियाल ने कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री के निजी हितों की रक्षा में लगे हुए हैं। अब ऐसा मामला सामने आने से उनके आरोपों को और मजबूती मिली है। उन्होंने एक अन्य पत्र का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के कथित संबंधों और राजनीतिक दबाव का भी जिक्र किया गया है, जिसमें स्थानीय नेताओं के माध्यम से कार्रवाई की आड़ में दबाव बनाने की बातें कही गई हैं।
SIT जांच की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सत्ताधारी दल का विधायक अपनी सुरक्षा को लेकर परेशान है, तो यह एक संकेत है कि आम जनता की स्थिति क्या होगी। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की न्यायिक निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है। उनका सुझाव है कि जांच हाईकोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का विश्वास बने रहे।
उत्तराखंड में राजनीति का यह मामला अब न केवल सत्ताधारी दल बल्कि विपक्ष के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
इस स्थिति पर नजर रखना आवश्यक है, क्योंकि इससे प्रदेश की राजनीतिक संरचना और लोकतंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।
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साभार, टीम इंडिया ट्वोडे, नंदिनी कुमारी
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