उत्तराखंड: समान नागरिक संहिता लागू होने पर विवाह पंजीकरण में 24 गुना वृद्धि, बना देश का पहला राज्य
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनकर इतिहास रच दिया है। इस क्रांतिकारी कानून के लागू होने के बाद आम लोगों में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता में भारी वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, पुराने अधिनियम की तुलना …
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने से विवाह पंजीकरण में जोरदार वृद्धि
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनकर विवाह पंजीकरण में अभूतपूर्व वृद्धि दिखाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में इस कानून के प्रभाव से पंजीकरण में 24 गुना उछाल आ गया है।
देहरादून। उत्तराखंड ने ऐतिहासिक पहल करते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू किया, जिसने विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में, यह राज्य यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना है, जिसने न केवल कानून में बदलाव किया है बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में भी एक कदम बढ़ाया है। इस कानून को लागू करने का वादा 2022 के विधानसभा चुनाव में किया गया था।
मुख्यमंत्री धामी ने बताया, "यह कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार, अवसर और सम्मान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है।" यूसीसी का उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और सभी नागरिकों विशेषकर महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुसार बनाया गया है।
यूसीसी का स्वरूप और प्रभाव
समान नागरिक संहिता में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, और लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधान शामिल हैं। इस कानून के तहत विवाह की आयु अब पुरुष और महिला के लिए समान कर दी गई है, जबकि बहुविवाह जैसी अभूतपूर्व प्रथाओं पर रोक लगा दी गई है। तलाक की प्रक्रिया को सभी धर्मों के लिए समान बनाया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि सभी को समान कानून का पालन करना पड़े।
आंकड़ों में यूसीसी का असर
संख्यात्मक आंकड़े बताते हैं कि:
- यूसीसी लागू होने के बाद, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक, केवल 6 महीनों में 3 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हुए हैं।
- पुराने कानून के अंतर्गत (2010 से 26 जनवरी 2025 तक) कुल 3 लाख 30 हजार 64 विवाह पंजीकरण हुए थे।
- प्रतिदिन की औसत के अनुसार, पुराने कानून के तहत 67 पंजीकरण होते थे, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1634 हो गई है, जो कि 24 गुना वृद्धि है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे एक 'सामाजिक सुधार' के रूप में देखा है। उन्होंने कहा, "यह घटना दर्शाती है कि जनता ने यूसीसी को स्वीकार किया है और इसे सामाजिक परिवर्तन के रूप में देख रही है। उत्तराखंड ने अन्य राज्यों के लिए एक नई दिशा प्रदर्शित की है, और मुझे विश्वास है कि अन्य क्षेत्र भी इस मॉडल को अपनाने की पहल करेंगे।"
इस वृद्धि के पीछे सरकार की व्यापक जनमत संग्रह और औपचारिकताएँ हैं। यूसीसी को लागू करने के बाद लोगों में विवाह पंजीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे यह देखा गया है कि कैसे एक कानून की क्षमता पूरे समाज को बदल सकती है।
इसके अलावा, इस कानून के लागू होने से सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता भी बढ़ी है, जिससे नागरिकों का अधिकार भी मजबूत हुआ है।
इस तरह, उत्तराखंड ने न केवल सामाजिक न्याय का आदेश दिया है, बल्कि यह साबित किया है कि संसदीय विधान और कानून केवल कागज पर सीमित नहीं होते। उनके सत्यता और प्रभाव का परीक्षण तब होता है जब वे जनता की भलाई के लिए कार्य करते हैं।
राज्य की यह सफलता निश्चित रूप से एक दृष्टांत है, और अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
अधिक अपडेट के लिए, यहाँ क्लिक करें
— Team India Twoday, सृष्टि शर्मा
What's Your Reaction?