जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र पर जमीन घोटाले का मुकदमा, जानें पूरी जानकारी

हल्द्वानी: भूमि विनियमितीकरण में धोखाधड़ी और लाखों रुपये के राजस्व नुकसान के नौ साल पुराने मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र हरेंद्र कुंजवाल समेत सात लोगों के खिलाफ काठगोदाम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आईजी कुमाऊं के निर्देश पर दर्ज इस मामले में बसंतपुर किशनपुर निवासी रविशंकर …

Oct 14, 2025 - 00:27
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जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र पर जमीन घोटाले का मुकदमा, जानें पूरी जानकारी
हल्द्वानी: भूमि विनियमितीकरण में धोखाधड़ी और लाखों रुपये के राजस्व नुकसान के नौ साल पुराने मामल

जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र पर जमीन घोटाले का मुकदमा

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कम शब्दों में कहें तो, हल्द्वानी में भूमिगत धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरेंद्र कुंजवाल सहित सात आरोपियों के खिलाफ काठगोदाम थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला नौ साल पुराना है और इसमें लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

यह मामला तब सामने आया जब बसंतपुर किशनपुर निवासी रविशंकर जोशी ने इस संदर्भ में शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर आईजी कुमाऊं ने संबंधित मामले की जांच के निर्देश दिए। 2016 में गौलापार के ग्राम देवला तल्ला पजाया में 53 बीघा जमीन का भूमि विनियमितीकरण किया गया, जिसमें सम्मानित व्यक्तियों और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।

भ्रष्टाचार का आरोप और मामले की गहराई

शिकायत के अनुसार, बलवंत सिंह नाम के व्यक्ति ने 2016 में 53 बीघा जमीन को वर्ग-एक ख से वर्ग-एक क में परिवर्तित किया। इस प्रक्रिया के दौरान, राजनैतिक रसूख वाले भूमाफियाओं और संबंधित अधिकारियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज और शपथ पत्र प्रस्तुत किए। बलवंत सिंह ने धनराशि जमा करने का झूठा शपथ पत्र पेश किया, जिसे अधिकारियों ने बिना किसी जांच के स्वीकार कर लिया। जब बाद में डीएम कार्यालय ने जमा राशि के साक्ष्य मांगे, तब वह पेश नहीं किए जा सके।

इस मामले में बलवंत सिंह पर आरोप लगा है कि उन्होंने पहले से पंजीकृत कृषि भूमि के बेशकीमती भूखंड की विनियमितीकरण सीमा से अधिक को फर्जी तरीके से अपने नाम पर करवाया। 10 मार्च 2016 को, यह भूमि कमलुवागांजा गौड़ निवासी रविकांत फुलारा को दान कर दी गई, जबकि बलवंत के दो जीवित पुत्र भी थे। रविकांत ने इस दान नामे के लिए 19 लाख रुपये का स्टांप शुल्क अदा किया।

घोटाले में शामिल प्रमुख व्यक्ति और घटनाक्रम

9 मई 2016 को इस भूमि को दीपा दरम्वाल, हरेंद्र कुंजवाल, मीनाक्षी अग्रवाल, अरविंद सिंह मेहरा, अजय कुमार गुप्ता, चेतन गुप्ता और अनीता गुप्ता को बेच दिया गया। आरोप है कि इन सभी ने राजस्व अधिकारियों के सहयोग से बेशकीमती सरकारी जमीन को बलवंत के नाम पर गलत तरीके से दर्ज करवाया। चार साल पहले, 2021 में रविशंकर जोशी ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया।

इस मामले में लैंड फ्रॉड कमेटी ने भी जांच की और उसके बाद ही मुकदमा दर्ज हुआ। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि इस लेनदेन में करोड़ों रुपये का काला धन शामिल था। रविकांत फुलारा को धमकाकर इस बैनामे पर साइन करवाए गए और 3.25 करोड़ रुपये वापस लेने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई।

सरकार के आदेश और जांच की स्थिति

2024 में जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने 7.68 एकड़ विवादित भूमि को सरकारी स्वामित्व में लेने का आदेश दिया था, लेकिन सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने इन आदेशों का पालन नहीं किया। इस लापरवाही से यह स्पष्ट होता है कि भूमाफियाओं और प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं की प्रशासन पर कितनी पकड़ है। पुलिस जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता अब सरकार की मंशा पर निर्भर करेगी।

इस मामले ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। लोग अब सुरक्षा और पारदर्शिता की उम्मीद कर रहे हैं। जब तक दोषियों को सजा नहीं दी जाती, तब तक समाज में विश्वास की कमी बनी रहेगी।

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सामाजिक न्याय के हक में लड़ाई जारी है और हम सभी को इस में शामिल होना चाहिए।

सादर,

टीम इंडिया टुडे
अनु शाही

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