देहरादून में एक शख्स ने नकली सोना गिरवी रखकर बैंक को लगाया लाखों का चूना
देहरादून से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक शख्सने बैंक को ही चूना लगा दिया। आरोपी ने बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रूपए का लोन लिया और फिर किश्त ही जमा नहीं की। ना ही बैंक से बातचीत की जिसके बाद शक होने पर बैंक ने जांच की तो सौना […] The post देहरादून में शख्स ने बैंक को ही लगा दिया चूना, नकली सोना गिरवी रख लिया लाखों का लोन first appeared on Vision 2020 News.
देहरादून में एक शख्स ने नकली सोना गिरवी रखकर बैंक को लगाया लाखों का चूना
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - India Twoday
कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में एक युवक ने बैंक को धोखा देते हुए नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रुपयों का लोन ले लिया और फिर किश्तें चुकाने से बचते रहा। यह मामला तब सामने आया जब बैंक ने जांच की।
देहरादून से आपको हैरान करने वाली एक घटना के बारे में बताने जा रहे हैं। एक शख्स ने बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रुपये का लोन लिया और इसके बाद न तो किश्तें चुकाईं और न ही बैंक से कोई संपर्क किया। इस मामले की जानकारी तब हुई जब बैंक ने अपनी जांच प्रारंभ की, जिसमें ये पाया गया कि गिरवी रखा सोना नकली था।
अन्य घटनाओं की तुलना में इस मामले की अनोखी परिस्थितियाँ
घटना के केंद्र में राजन नाम का व्यक्ति है, जो उत्तम नगर, देहरादून का निवासी है। 16 अक्टूबर 2024 को वह शहर के एक प्रतिष्ठित बैंक में गया और जमीन खरीदने के लिए वित्तीय सहायता की मांग की। उसने बैंक में एक चेन और एक ब्रेसलेट गिरवी रखकर गोल्ड लोन के लिए आवेदन किया। बैंक के मूल्यांकनकर्ता ने सोने की गुणवत्ता और मूल्यांकन की जांच की और उसके आधार पर आरोपी के खाते में ₹3.5 लाख की राशि ट्रांसफर की गई।
नकली सोना गिरवी रखकर लोन की राशि का हेरफेर
राजन के बारे में जानकारी मिली है कि वह मूल रूप से दिल्ली का निवासी है। लोन की राशि मिलने के तुरंत बाद, उसने पूरी धनराशि को दिल्ली स्थित एक अन्य बैंक में ट्रांसफर कर दिया। आगे की रणनीति के तहत, राजन फिर 16 दिसंबर 2024 को बैंक में आया और फिर से नकली सोना गिरवी रखकर लोन की राशि को अपने किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस प्रकार, उसने कुल मिलाकर ₹36 लाख 16 हजार का गोल्ड लोन लेकर बैंक को धोखा दिया।
बैंक ने जब संदेह किया तो हुआ खुलासा
छह महीने तक राजन ने बैंक से संपर्क नहीं किया। जब बैंक कर्मियों ने उससे संपर्क किया, तो उसने लोन की राशि वापसी का आश्वासन दिया। लेकिन जब राजन ने बार-बार चुकाने में टालमटोल की, तो बैंक ने संदेह किया और जांच के लिए गहनों की कानूनी परीक्षा करवाई। परिणामस्वरूप, बैंक में गिरवी रखे गए गहने नकली पाए गए। इस घटना के बाद, बैंक ने राजन और उसके पांच साथी आरोपी सौरभ, योगेश त्यागी, जय शर्मा, और सुनील थापा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
क्यों जरूरी है इस तरह की जांच?
यह मामला हमें याद दिलाता है कि बैकों को अपने लोन प्रावधान और गिरवी की शर्तों में कितनी चौकसी बरतनी चाहिए। यह जरूरी है कि बैंक अपने ग्राहकों की पहचान और गिरवी रखी गई संपत्ति की मान्यता करने में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें। जब तक कि सभी पहलुओं की पुष्टि न हो जाए, तब तक लोन की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए। इससे इस तरह की धोखाधड़ी के मामलों को कम किया जा सकेगा।
अंत में, यह घटना एक सबक है, जो हमें बताती है कि आर्थिक लेनदेन में सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। यदि आप और अधिक अपडेट पाना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट India Twoday पर जाएं।
साभार - टीम इंडिया ट्वोडे
What's Your Reaction?