धामी सरकार की कमियों का खुलासा: कर्नल कोठियाल के बयान पर धस्माना का जोरदार जवाब
देहरादून। उत्तरकाशी के धराली में हुई भयावह आपदा को चार महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार मृतकों व लापता लोगों का सही आंकड़ा सार्वजनिक नहीं कर रही है। यह गंभीर आरोप खुद सरकार के प्रमुख दायित्वधारी रहे कर्नल अजय कोठियाल ने अपने ताजा वायरल बयान में लगाया है, जिसने सरकार की लीपापोती को …
धामी सरकार की कमियों का खुलासा: कर्नल कोठियाल के बयान पर धस्माना का जोरदार जवाब
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कम शब्दों में कहें तो, कर्नल अजय कोठियाल के ताजा बयान ने धामी सरकार की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। उत्तरकाशी की धराली में हुई भयावह आपदा के चार महीने बाद भी सरकार ने मृतकों एवं लापता लोगों का सही आंकड़ा नहीं बताया है।
देहरादून: उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई आपदा ने सरकार की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। चार महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने मृतकों और लापता लोगों का सही आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। यह गंभीर आरोप खुद सरकार के प्रमुख दायित्वधारी रहे कर्नल अजय कोठियाल ने अपने हालिया वायरल बयान में लगाया है। उनका यह बयान न केवल सरकार की लीपापोती को उजागर करता है, बल्कि इस संवेदनशील मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
कर्नल कोठियाल का बयान और धस्माना की प्रतिक्रिया
सोमवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कर्नल कोठियाल ने स्पष्ट रूप से बताया है कि धराली में अभी भी 137 लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं। धस्माना ने इसे सरकार की नाकामी और शर्मनाक बताया जो वही व्यक्ति कह रहा है जिसने केदारनाथ पुनर्निर्माण का जमीनी अनुभव हासिल किया है।
धस्माना ने स्पष्ट किया कि आपदा के वैज्ञानिक कारणों की जांच भी केवल कागजी और फोटो सेशन तक सीमित होती जा रही है। धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से आरोप लगाती रही है कि सरकार को जान-माल के नुकसान का सही आंकड़ा जनता को बताना चाहिए, लेकिन चार महीने बाद भी लापता लोगों की संख्या छुपाई जा रही है।
सरकार का जवाब क्या है?
कांग्रेस नेता ने साफ कहा कि इस मामले में पार्टी भाजपा के किसी प्रवक्ता से नहीं, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कर्नल कोठियाल के हर बयान और हर बिंदु पर स्पष्ट जवाब चाहती है। यह एक गंभीर विषय है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है वास्तविक स्थिति?
आपदा के बाद, जब विभिन्न दलों के नेता सरकार से जवाबदेही मांग रहे हैं, तब इस बयान ने सरकार के लिए एक गंभीर चौंकाने वाला मोड़ पैदा किया है। क्या राज्य सरकार वाकई अपने कर्तव्यों को निभा रही है? क्या मृत और लापता लोगों के परिवारों के लिए उचित कार्रवाई हो रही है? इन सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं।
उत्तराखंड में आपदाओं के प्रबंधन के लिए एक ठोस नीति बनानी पड़ेगी, जो लोगों को सुरक्षा का अनुभव दे सके। कर्नल कोठियाल का वास्तविक अनुभव इस दिशा में मददगार हो सकता है।
इसी संदर्भ में, कर्नल कोठियाल जैसे अनुभवी लोगों के सुझावों को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के स्तर पर सुनना आवश्यक है। यह न केवल राजनीतिक सवाल है, बल्कि मानवता की जिम्मेदारी भी है।
हमारे देश में ऐसी आपदाएं अक्सर होती रही हैं, और उनकी जांच व निपटारे की आवश्यकता आज के समय में और भी अधिक बढ़ गई है।
सही जानकारी और जनहित में उठाए गए कदम ही इस कुख्यात समस्या पर काबू पाने में सहायक होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट है कि धामी सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने होंगे।
इसी के साथ, हम सभी से अपील करते हैं कि वे इस विषय पर अधिक जानकारी हासिल करें और इसकी चर्चा करें। इसके लिए, अधिक अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.
टीम इंडिया टुडेज, प्रिया शर्मा
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