नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित: 484 गांवों ने मिलकर उठाई आवाज़
रैबार डेस्क: हिमालयी महाकुंभ के नाम से मशहूर, 280 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा के... The post नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित करने पर बढ़ा विवाद, 484 गांवों ने की महापंचायत appeared first on Uttarakhand Raibar.
नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित: 484 गांवों ने मिलकर उठाई आवाज़
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कम शब्दों में कहें तो, नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 को स्थगित करने के निर्णय पर 484 गांवों की महापंचायत ने विरोध किया है। यह महापंचायत नंदानगर में आयोजित की गई, जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों और धार्मिक संगठनों ने अपना सख्त रुख अपनाया।
रैबार डेस्क: हिमालयी महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा के आयोजन पर राजनीतिक टकराव और सियासी गणित के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। 280 किलोमीटर लंबी, ऐतिहासिक राजजात यात्रा का आयोजन 2026 में प्रस्तावित था, लेकिन इसे स्थगित करने का निर्णय लेना अब विवाद का कारण बन गया है। इस विषय पर स्थानीय धार्मिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
महापंचायत की मांगें और उद्देश्यों का स्पष्टता
महापंचायत में स्थानीय नेताओं ने जोर देकर कहा है कि यात्रा संबंधित लिया गया एकतरफा निर्णय स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मां नंदा धाम कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र पर उच्च स्थान देने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। नंदानगर ब्लॉक सभागार में आयोजित इस महापंचायत में, मां नंदा सिद्धपीठ कुरुड मंदिर समिति ने मिलकर नंदा की बड़ी जात को पुनः प्रारंभ करने की मांग की है।
राजजात यात्रा का स्थगन: कारण और परिणाम
रविवार को श्रीनंदा राजजात समिति ने मुश्किल हालात और बर्फबारी में यात्रियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने का निर्णय लिया। यह निर्णय कई जटिलताओं की वजह से लिया गया था, जिसमें इस वर्ष मलमास के कारण यात्रा का समय भी सीधा प्रभाव डाल रहा था। सितंबर माह के अंत में यात्रा समाप्त होने की स्थिति में, बुग्यालों में बर्फबारी और राजजात के पड़ावों पर ढांचागत सुविधाओं का अभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
महापंचायत में ये सभी सवाल उठाए गए कि क्या यह फैसला सही था। समिति ने वसंत पंचमी के अवसर पर यात्रा के लिए नया कार्यक्रम जारी करने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि इस विवाद का क्या समाधान निकलता है और क्या यात्रा समय पर आयोजित की जा सकेगी।
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यह स्थिति स्थानीय समुदायों के लिए न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यात्रा का स्थगन विभिन्न प्रकार की आर्थिक समस्याओं को जन्म दे सकता है, जिनका समाधान करने की जरूरत है।
टूरिज़्म पर निर्भर यह क्षेत्र वर्षों से नंदा देवी राजजात यात्रा के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देता आया है। इसको ध्यान में रखते हुए, आने वाले दिनों में इसका प्रभाव न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक टकराव में भी देखना पड़ेगा।
आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लाखों लोगों की आस्था से जुड़े इस महाकुंभ के आयोजन की स्थिति में क्या बदलाव आते हैं। स्थानीय प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच एक सकारात्मक संवाद की आवश्यकता है, ताकि यात्रा का आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।
टीम इंडिया टुडे, साक्षी शर्मा
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